धनबाद लोक सभा: मतदाता अपना सांसद चुनने में बदलते रहे हैं नजरिया,1952 से लेकर 2019 तक के रिकॉर्ड सबूत 

    धनबाद लोक सभा: मतदाता अपना सांसद चुनने में बदलते रहे हैं नजरिया,1952 से लेकर 2019 तक के रिकॉर्ड सबूत 

    धनबाद(DHANBAD): पूरे झारखंड में अभी धनबाद लोकसभा सीट की चर्चा है.  बंगाल से कट कर धनबाद, बिहार में कैसे आया ,यह एक रोचक कहानी है.लेकिन उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री श्रीकृष्णा सिंह और बंगाल के मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय के बीच तनातनी की वजह से ही धनबाद, बिहार के खाते में आया और अब यह झारखंड में है. आजादी के बाद से हुए लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक धनबाद लोकसभा सीट पर बंगाली एवं बिहार मूल के सांसदों का कब्जा रहा है. इस बार भाजपा ने स्थानीय ढुल्लू महतो को उम्मीदवार बनाया है. धनबाद लोकसभा से 1952 में पीसी बोस सांसद बने थे, 1957 में डीसी मलिक सांसद चुने गए थे. 1962 में पीआर चक्रवर्ती चुनाव जीते थे. फिर 1967 में ललिता राजलक्ष्मी चुनाव जीती थी. 1971 में राम नारायण शर्मा विजय हुए थे. 1977 में एके राय जेल में रहते हुए चुनाव जीते थे. फिर 1980 में एके राय ही विजई रहे. 1984 में कांग्रेस के टिकट पर शंकर दयाल सिंह चुनाव जीते. फिर 1989 में एके राय को जीत मिली. फिर 1991 में रीता वर्मा जीती .

    1996 ,1998 और 1999 में लगातार रीता वर्मा जीत दर्ज की. उसके बाद 2004 में चंद्रशेखर दुबे चुनाव जीते. वह कांग्रेस के उम्मीदवार थे. 2009 में पशुपतिनाथ सिंह, 2014 में पशुपतिनाथ सिंह और 2019 में भी वही चुनाव जीते. 1991 के बाद इस सीट पर भाजपा की उम्मीदवार जीते. सिर्फ 2004 में कांग्रेस को जीत मिली. 1991 में धनबाद के पुलिस अधीक्षक रणधीर प्रसाद वर्मा की शहादत हुई. बैंक ऑफ़ इंडिया की शाखा को लूटने से बचाने के क्रम में उनकी शहादत हुई .धनबाद  उस समय पहली बार एके-47 देखा था.  रणधीर वर्मा की शव यात्रा में लगभग धनबाद उमड़ पड़ा था. भाजपा ने इसको इन कैश करने की कोशिश शुरू की और उस समय बिहार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष तारा कांत झा थे. उन्होंने शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा की पत्नी प्रोफेसर रीता वर्मा से संपर्क किया और काफी प्रयास के बाद रीता वर्मा चुनाव लड़ने को राजी हो गई.

    1991 में उन्होंने चुनाव लड़ा और विजय दर्ज की. रीता वर्मा केंद्र में मंत्री तक रही. धनबाद को मिनी बिहार भी कहा जाता है. धनबाद औद्योगिक शहर के रूप में स्थापित है. बिहार और बंगाली यहां के निवासी हैं. कोयला खनन के कारण बाहर से लोग यहां आए और यही के होकर रह गए. यहां के लोग सांसद चुनने में भी अपनी नजरिया बदलते रहे है. कभी यहां के लोग अपना सांसद बंगाली को चुनते रहे तो कभी बिहार मूल के लोगों को. 2024 में पहली बार किसी ओबीसी को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है. इसके पहले कोई अन्य पार्टियां भी नही बनाई थी. भाजपा के प्रत्याशी ढुल्लू महतो फिलहाल बाघमारा से विधायक हैं. अभी इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार की प्रतीक्षा की जा रही है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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