देवघर लखराज प्रकृति जमीन मामला : आपातकालीन दुकानों को छोड़ कर शहर की सभी दुकानें आज बंद, लाखों करोड़ों रुपये का नुकसान

    देवघर लखराज प्रकृति जमीन मामला : आपातकालीन दुकानों को छोड़ कर शहर की सभी दुकानें आज बंद, लाखों करोड़ों रुपये का नुकसान

    देवघर(DEOGHAR): देवघर में लखराज प्रकृति की जमीन का हस्तांतरण और निबंधन शुरू करवाने की लड़ाई सिर्फ तीर्थ पुरोहित और जिला प्रशासन के बीच नहीं रही. अब यह मामला जनांदोलन बन गया है. पिछले 15 मार्च से पंडा धर्म रक्षिणी सभा के महामंत्री कार्तिक नाथ ठाकुर के नेतृत्व में पुरोहित समाज द्वारा आमरण अनशन दिया जा रहा है. 4 दिन बीत जाने के बाद भी लखराज प्रकृति की जमीन का हस्तांतरण और निबंधन प्रशासन द्वारा शुरू नहीं होने से आमरण अनशन पर बैठे लोगों की तबियत भी धीरे धीरे खराब होती जा रही है. इनके आंदोनल में कई सामाजिक संगठन, संघ और जनप्रतिनिधियों का भी साथ मिल रहा है. लेकिन अब इनका साथ व्यवसायी वर्ग द्वारा भी दिया जा रहा है. लखराज प्रकृति की जमीन का हस्तांतरण और निबंधन शुरू करने के लिए आज स्वेच्छा से शहर की सभी दुकानें बंद है. सिर्फ आपातकालीन दुकानों को छोड़ कर सभी दुकाने बंद है.

    बाजार बंद होने से लाखों करोड़ों रुपये का नुकसान

    दुकानदार अपनी दुकानों को बंद कर तीर्थ पुरोहित समाज की एक मात्र मांग का पुरजोर समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं. बाजार बंद होने से लाखों करोड़ों रुपये नुकसान होने की बात की जा रही है. क्योंकि धर्मनगरी होने के कारण प्रतिदिन हज़ारों लोग देवघर के बाबा मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं. इन्हीं लोगों के कारण देवघर शहर का बाजार गुलजार रहता है. लेकिन आज स्वेच्छा से दुकान बंद है और दुकानदारों को आज बिक्री नहीं होने का तनिक भी मलाल नहीं है. 

    यह है मामला 

    दरअसल देवघर बाबा मंदिर से सटे आसपास क्षेत्र की जमीन लखराज(बसौड़ी) प्रकृति की है.  लेकिन इस जमीन की खरीद बिक्री और रजिस्ट्री नहीं होने के कारण तीर्थ पुरोहित समाज में नाराजगी है. लखराज प्रवृत्ति की जमीन को स्टेट के जमींदार अपने सिपाही,द्वारपाल,पुजारी इत्यादि को बंदोबस्त किया करते थे. जो लगान मुक्त होता था. जमींदारी उन्मूलन के बाद इस प्रकार की जमीन का मोटेशन अथवा रजिस्ट्री के लिए लगान आवश्यक होने लगा. लेकिन देवघर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण न तो खरीद बिक्री हो पा रही है न ही रजिस्ट्री इसके अलावा इसका लगान रेट भी अभी तक तय नहीं किया गया है. ऐसे में तीर्थ पुरोहित अपनी ही जमीन की खरीद बिक्री या अन्य उपभोग करने से बंचित रह रहे हैं. जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में देवघर शहर का विकास हुआ है ऐसे में पुरोहित समाज की मांग जायज है. अब देखना होगा की आज की बंदी और पुरोहितों का आमरण अनशन का प्रभाव जिला प्रशासन पर कितना पड़ता है. 


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