दुर्लभ जड़ी-बूटियों का केंद्र बना दलमा, शोध और रोजगार की बढ़ी संभावना

    दुर्लभ जड़ी-बूटियों का केंद्र बना दलमा, शोध और रोजगार की बढ़ी संभावना

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): जमशेदपुर से सटे दलमा के घने जंगल सिर्फ वन्य जीवों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ औषधीय पौधों के कारण भी चर्चा में है. यहां कई ऐसे वनस्पति प्रजातियां पाई गई हैं, जिनमें कई रोगों के उपचार की क्षमता मौजूद है. वन विभाग इन पौधों के संरक्षण और उनके औषधीय गुणों पर शोध की तैयारी कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन पौधों का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा, प्राकृतिक उपचार और जैव विविधता संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है. दलमा में कुछ ऐसी दुर्लभ प्रजातियां भी मिली हैं, जो अब तक देश में पहली बार दर्ज की गई हैं. इसमें हेमिग्राफीस जैसे पौधे शामिल हैं, जो पहले केवल अरब, फिलीपींस और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाए जाते थे. इससे दलमा क्षेत्र की जैव विविधता और भी महत्वपूर्ण हो गई है. दलमा के जंगलों में मौजूद यह प्राकृतिक संपदा आने वाले समय में स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है.

    स्थानीय को मिल सकता है रोजगार का अवसर
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन पौधों पर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाए, तो भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं. साथ ही स्थानीय लोगों को भी इन पौधों के संरक्षण और उपयोग से रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. दलमा के जंगलों में पीपल, बरगद, चिरायता, आंवला, हर्रे, अर्जुन, काला शीशम, कालमेघ, अमलताश आदि पौधे भी पाए जाते हैं, जिनसे  इलाज संभव है.  
    काला शीशम पेट दर्द, मोटापा, अपच की रामबाण दवा है. कालमेघ में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण है. यह बुखार, गैस, कब्ज के अलावा आंत की समस्या में कालमेघ का उपयोग किया जाता है. 

    ये दुर्लभ औषधीय पौधे भी दलमा में मौजूद 
    दलमा में कई दुर्लभ औषधीय पौधे भी पाए गए है. प्रभारी वनपाल राजा घोष ने इन दुर्लभ पौधों की खोज की है. इन पौधों में क्रोजोफोरा रोटलेरी, मोरिंडा प्यूब्सेंस और कैसलपिनिया बॉन्डुक शामिल हैं.  क्रोजोफोरा रोटलेरी जॉन्डिस के इलाज में उपयोगी माना जाता है. मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में भी यह लाभकारी है. इसके अलावा गठिया और सूजन, हृदय रोग और ट्यूमर के इलाज में भी कारगर है. मोरिंडा प्यूब्सेंस एग्जिमा और त्वचा रोगों में लाभकारी है. बुखार और अल्सर में भी यह उपयोगी है. पाचन संबंधी समस्याओं, मासिक धर्म विकार और यौन संचारित रोगों में इसका उपयोग किया जा सकता है. कैसलपिनिया बॉन्डुक फोड़े-फुंसी और खुजली जैसे त्वचा रोगों में लाभकारी है. दांत दर्द में भी यह राहत का काम करता है. यह गंजेपन में भी सहायक है. खांसी, अस्थमा, पेट दर्द में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

    दलमा जंगल में औषधीय पौधों का खजाना
    प्रभारी वनपाल राजा घोष ने बताया कि दलमा का जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध क्षेत्र है. यहां बड़ी संख्या में औषधीय पौधे और दुर्लभ वनस्पतियां पाई जाती हैं. इनसे कई बीमारियों का इलाज हो सकता है. उन्होंने कहा कि इन पौधों की पहचान और संरक्षण न सिर्फ उपचार पद्धति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जैव संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा. दलमा वन्य जीव अभयारण्य अब सिर्फ वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि दुर्लभ औषधीय पौधों के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है. यहां कई ऐसी जड़ी-बूटियों की प्रजातियां मिली हैं, जो देश में कहीं नहीं मिलती.



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