क्राइम फाइल जमशेदपुर : वर्दी पहनने वाला बना साइको किलर, जानिए कार वालों पर क्यों बरसाता था गोलियां

    क्राइम फाइल जमशेदपुर : वर्दी पहनने वाला बना साइको किलर, जानिए कार वालों पर क्यों बरसाता था गोलियां

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): लौहनगरी जमशेदपुर ने कई कुख्यात अपराधियों का दौर देखा है. अखिलेश सिंह, पंकज दुबे, सुधीर दुबे, अमरनाथ सिंह और अन्य नामों के बीच एक ऐसा अपराधी भी उभरा, जिसकी कहानी सबसे अलग थी. इस अपराधी को कार वालों से नफरत थी. वह कभी खुद पुलिस की वर्दी पहनता था. लेकिन अक्टूबर 2013 से अप्रैल 2014 तक उसने शहर में सीरियल क्राइम कर दहशत फैला दी. अपराधी अंजन शुक्ला पहले पुलिस विभाग में तैनात था. अनुशासनहीनता और लापरवाही के कारण उसे कई बार निलंबित किया गया. बाद में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते जमशेदपुर पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया. अंजन शुक्ला की पहचान एक ऐसे अपराधी के रूप में बनी, जिसे लग्जरी कार में घूमने वालों से खास नफरत थी. वह अक्सर महंगी कार सवार लोगों को निशाना बनाता था.  लगातार एक जैसी वारदातों और सनकी अंदाज के कारण पुलिस ने उसे साइको किलर तक कहना शुरू कर दिया था. कई साल बीतने के बाद भी अंजन शुक्ला फरार है. पुलिस ने उसपर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है. लेकिन अब तक वह कानून की पकड़ से बाहर है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. लेकिन जमानत मिलने के बाद से वह फरार है. बाद में फरारी के दौरान ही कोर्ट ने एक मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है. 

    कार वालों से आखिर क्यों हुई नफरत
    जमशेदपुर के गोविंदपुर निवासी अंजन शुक्ला ने वर्ष 2013 में अपना गिरोह तैयार किया था. उसका व्यवहार बेहद हिंसक था और वह बेवजह भी लोगों पर हमला कर देता था. जांच के दौरान सामने आया कि अंजन शुक्ला को खास तौर पर कार सवार लोगों से नफरत थी. पूछताछ में उसने बताया था कि एक बार उसकी कार को धक्का लगने के बाद विवाद हुआ था. उस समय वह पुलिस की वर्दी में था और उसकी पत्नी भी साथ थी. विरोध करने पर आसपास के लोगों ने मदद करने के बजाय उसकी पिटाई कर दी. इस घटना ने उसके मन में गहरा आक्रोश भर दिया. बाद में विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबन के बाद उसने अपराध की राह पकड़ ली. पुलिस ने 27 जुलाई 2014 को अंजन शुक्ला और उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया था. अंजन और उसके गिरोह ने एक के बाद एक नौ आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया था. लगातार सनकी तरीके से वारदात करने के कारण पुलिस ने इस गैंग को साइको किलर गिरोह नाम दिया था. 2014 में गिरफ्तारी के बाद वह कई महीनों तक जेल में रहा. बाद में उसे जमानत मिल गई. 


    इन घटनाओं को दिया था अंजाम
    अंजन शुक्ला गिरोह की वारदातों का एक अजीब पैटर्न था. गिरोह अक्सर कार में चलने वाले लोगों को निशाना बनाता था. गिरोह द्वारा शहर में कई हमले सीधे कार सवार लोगों पर किए गए. इस गिरोह ने 23 नवंबर 2013 को बिष्टुपुर यूनाइटेड क्लब के पास कार सवार टाटा स्टील के अधिकारी विपुल कुमार को गोली मारी थी. हालांकि विपुल कुमार इसमें बच गए. दिसंबर 2013 में परसुडीह में पूर्व सैनिक ललित कुमार की हत्या भी अंजन शुक्ला ने की थी. फिर 22 फरवरी 2014 को टाटा मोटर्स के अधिकारी ब्रजेश सहाय की नीलडीह कॉलोनी में घर के पास गोली मार हत्या कर दी थी. उस वक्त ब्रजेश सहाय अपनी कार में थे. मार्च 2014 को टाटा स्टील के अधिकारी रत्नेश राज को घोड़ाबांधा में गोली मारी थी. वे कार पर ही थे और इलाज के क्रम में उनकी मौत हो गई थी. 15 जून 2014 को टाटा मोटर्स अस्पताल के पास इनोवा पर आए दो इंजीनियर शरणदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह को भी अपराधियों ने बेवजह गोली मारी थी. 27 फरवरी 2014 को गोविंदपुर रेलवे फाटक के पास चाउमिन विक्रेता पर फायरिंग व लूट इसी गिरोह ने किया था. पुलिस ने गिरोह के बारे में कहा था कि यह एबनॉर्मल किलर बेहेवियर का मामला है. पुलिस का कहना था कि अपराधियों की सोच थी कि बड़े लोग ही चमचमाती कार में चलते हैं. इस कारण इन पर फायरिंग कर देते थे. 

    2005 में जिला पुलिस में हुआ था भर्ती
    अंजन शुक्ला की कहानी इसलिए भी अलग मानी जाती है क्योंकि वह अपराध की दुनिया में आने से पहले खुद पुलिस बल का हिस्सा था. वर्ष 2005 में वह जमशेदपुर जिला पुलिस बल में भर्ती हुआ था. वह मूल रूप से बिहार के मुंगेर जिले के बनगांवा गांव का रहने वाला है. उसके परिवार की पृष्ठभूमि भी अलग थी. उसके चार भाई सेना में कार्यरत रहे, लेकिन अंजन ने वर्दी में रहते हुए ही अपराध की राह पकड़ ली. अंजन शुक्ला कई प्रभावशाली लोगों के अंगरक्षक के रूप में भी तैनात रहा था. तत्कालीन सिटी एसपी अजय लिंडा का भी बॉडीगार्ड रहा. उसके गैंग में मंगल तिवारी, मनीष पांडेय और कन्हैया झा जैसे साथी शामिल थे. गिरोह के मंगल तिवारी की हाल ही में परसुडीह में हत्या हुई है.


     

     



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