भाजपा: संथाल पर भाजपा का फोकस क्यों नहीं,केवल एक ही समिति में क्यों,क्या बदल रहा फोकस पॉइंट

    संथाल परगना होकर ही झारखंड की राजनीति जाती है.  संथाल परगना  जिस पर आशीर्वाद बरसा देता है, उसकी सरकार बन जाती है

    भाजपा: संथाल पर भाजपा का फोकस क्यों नहीं,केवल एक ही समिति में क्यों,क्या बदल रहा फोकस पॉइंट

    धनबाद(DHANBAD):  अभी बंगाल में चुनाव है.  बंगाल चुनाव में झारखंड के संथाल परगना की भी भूमिका रहती आई है.  संथाल परगना के कई इलाकों के बॉर्डर बंगाल से सटे हुए है.  बीजेपी बंगाल में पूरी ताकत झोंक रखी है.  ऐसे में झारखंड के भजपा प्रदेश समिति की ,जो घोषणा हुई है, उसमें संथाल परगना के उपेक्षा के आरोप लग रहे हैं.  भाजपा ने अन्य जगहों को तो प्रतिनिधित्व दिया है, लेकिन संथाल परगना से केवल  सुनील सोरेन को समिति में लिया गया है .  यह बात  संथाल परगना के भाजपा नेताओं  के साथ-साथ अन्य को भी पच  नहीं रहा है.  नाम नहीं छापने की  शर्त पर कोयलांचल  के भाजपा के कई नेताओं ने कहा कि यह सही नहीं हुआ है. 

    झारखंड की राजनीति संथाल होकर ही जाती है ,फिर भी उपेक्षा 

     संथाल परगना होकर ही झारखंड की राजनीति जाती है.  संथाल परगना  जिस पर आशीर्वाद बरसा देता है, उसकी सरकार बन जाती है.  ऐसे में संथाल परगना  की उपेक्षा  दूरगामी प्रभाव डाल सकती है.  वैसे रघुवर दास की सरकार में भाजपा ने संथाल पर बड़ा फोकस किया था.  लेकिन 2019 के चुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिली।  उसके बाद के चुनाव में भी भाजपा को सफलता नहीं मिली।  सबसे बड़ी बात है कि संथाल परगना  में अभी सांसद निशिकांत दुबे का दबदबा है.  वह भाजपा के फायर ब्रांड नेता माने जाते  है.  उनकी राजनीति संथाल परगना से जुड़ी हुई है.  ऐसे में संथाल परगना  से प्रदेश समिति में सिर्फ एक का जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है. 

    धनबाद के दो लोग समिति में हैं,जिसमें एक कप प्रमोशन मिला है 

     धनबाद से दो लोग  समिति में रखे गए है.  धनबाद से सटे चंदनकियारी  के पूर्व विधायक भी समिति में है.  कोल्हान से तीन लोग समिति में है.  ऐसे में संथाल की उपेक्षा  क्यों की  गई, इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? इस पर नेता सवाल कर रहे हैं.  कहा तो यह भी  जा रहा है कि प्रदेश समिति में कई ऐसे लोग हैं, जो लंबे समय से समिति में रहते आए है.  आदित्य साहू जब प्रदेश अध्यक्ष बने तो उम्मीद की जा रही थी कि नए पैटर्न पर प्रदेश समिति का गठन होगा।  लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं, पुराने लोगों का प्रदेश समिति पर दबदबा रहा.  यह अलग बात है कि झारखंड में भाजपा अभी अपने खराब दौर  से गुजर रही है.  भाजपा को नए ढंग से खड़ा होने और करने की जरूरत है.  वैसे, भाजपा लोगों से कनेक्ट बढ़ाने के लिए कई उपाय कर रही है.  धनबाद के एक भाजपा नेता के अनुसार अब पार्टी को पुराने ढर्रे  पर लौटाने और सशक्त बनाने  की कोशिश हो रही है. देखना होगा कि अपनी खोई जमीन को वह कैसे पाती है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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