धनबाद (DHANBAD): भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू एक साथ कई चुनौतियों से घिरते दिख रहे हैं. एक तो उनका नाम लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उछाल दिया गया, तो धनबाद हो, कोल्हान हो अथवा हजारीबाग, सब जगह बीजेपी के नेता आपस में लड़ रहे हैं. सभी जगह राजनीतिक लड़ाई छिड़ी हुई है. इस लड़ाई को संभालना प्रदेश अध्यक्ष के लिए कठिन हो रहा है. झारखंड में निकाय चुनाव होने के बाद भाजपा नेताओं की खींचतान अधिक बढ़ गई है. जिन जगहों पर भाजपा के बड़े और कद्दावर नेता हैं, वहां यह खींचतान अधिक दिख रही है. धनबाद में तो भाजपा गुटों में बंट गई है, तो कोल्हान में भी स्थिति अच्छी नहीं है. खास बात यह है कि झारखंड में भाजपा नेता 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से ही सीरियस है.
2029 के लिए अभी से जमीन तैयार करने की हो रही कोशिश
समर्थको को आगे कर नाम चर्चे में लाये जा रहे है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को यह कहना पड़ गया है कि लोकसभा चुनाव लड़ने की उनकी कोई इच्छा नहीं है. मतलब साफ है कि झारखंड बीजेपी में खींचतान की राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है. धनबाद में निगम चुनाव के बाद भाजपा तीन गुटों में दिख रही है. एक गुट सांसद ढुल्लू महतो का है, तो दूसरा गुट विधायक रागिनी सिंह का है, तो तीसरा विधायक राज सिन्हा का है. तीनों गुट में "पावर" की लड़ाई चल रही है. इधर, भाजपा के एक नेता की माने तो कोयलांचल में तो लड़ाई चल ही रही है,
कोल्हान में भी इसी तरह की लड़ाई चल रही है
कोल्हान में भी इसी तरह की लड़ाई चल रही है. सरायकेला-खरसावां में झारखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री के बीच राजनीतिक लड़ाई चल रही है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बीच राजनीतिक लड़ाई छिड़ गई है. वहां भी "पावर" की लड़ाई चल रही है. लोग बताते हैं कि चंपई सोरेन लगातार संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं. दरअसल, यह लड़ाई भी निकाय चुनाव से ही शुरू हुई है. लोग बताते हैं कि निकाय चुनाव में पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बनाने को लेकर अर्जुन मुंडा और चंपई सोरेन के बीच मनमुटाव शुरू हुआ और वह बढ़ता चला गया. बताया जाता है कि मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी अर्जुन मुंडा के समर्थक घोषित किए गए, जबकि चंपई सोरेन किसी दूसरे को चाहते थे. सब कुछ के बावजूद अर्जुन मुंडा के समर्थक मेयर और डिप्टी मेयर बन गए. इसके बाद से खींचतान और बढ़ गई.
हज़ारीबाग़ भी कहीं से विवाद में पीछे नहीं
झारखंड के हजारीबाग का भी हाल वही है. सांसद-विधायक और पूर्व विधायकों के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती जा रही है. बयानबाजी शुरू है, तो सोशल मीडिया पर एक दूसरे के खिलाफ निशाना साधा जा रहा है. इधर, पिछले कुछ समय से सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया पर अंदरूनी कलह और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर चर्चा चल रही है. आदित्य साहू को कहना पड़ा है कि लोकसभा का चुनाव लड़ने की उनकी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है. एक कार्यकर्ता की ओर से उनका नाम लोकसभा प्रत्याशी के रूप में उछाले जाने पर आदित्य साहू ने कहा कि वर्तमान में रांची लोकसभा क्षेत्र का नेतृत्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ कर रहे है. वह पूरी निष्ठा से काम कर रहे है. ऐसी स्थिति में अनावश्यक रूप से मेरे नाम को उछलकर भ्रम की स्थिति पैदा नहीं किया जाए.

