धनबाद(DHANBAD): पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल में लगातार हो रही वृद्धि ने राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है. प्रदेशों में चाहे भाजपा की सरकार हो अथवा विपक्ष की, सभी सरकार दबाव महसूस करने लगी है. ऐसा इसलिए कि राज्य सरकारें अपना टैक्स घटाकर लोगों को राहत दे सकती है, लेकिन ऐसा करेगी, इसमें संदेह है . दूसरी ओर पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य बढ़ने से जनता पर भारी बोझ अचानक पड़ गया है. जिंसों की कीमत बढ़ने लगी है. जहां विपक्ष की सरकारें हैं, वहां तो दबाव अधिक है. जानकारी के अनुसार मूल्य और बढ़ सकते है.
कंपनियों का घाटा अभी नहीं हुआ है ख़त्म
सूत्रों के अनुसार तेल कंपनियों के दाम बढ़ाने के बाद भी घाटा खत्म नहीं हुआ है. कंपनियों को अभी भी लगभग 600 करोड रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है. मूल्य वृद्धि के पहले यह घाटा 1000 करोड़ रोज का था. अगर झारखंड की बात की जाए तो पेट्रोल पर 22% वैट जोड़ एक रुपया प्रति लीटर अतिरिक्त सेस यानी कुल मिलाकर 24.30 रुपया प्रति लीटर वैट लगता है. इसी प्रकार डीजल पर लगभग 22% वैट लगता है. अब सवाल उठता है कि क्या उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए राज्य सरकारें कोई कदम उठाएगी, क्योंकि 10 -11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि हुई है.
झारखंड में नहीं कम होंगे वैट
इधर, झारखंड सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के बीच वैट कम करने से इनकार कर दिया है. वित्त मंत्री का कहना है कि हम बरसों से 22% टैक्स ही ले रहे हैं. राज्य सरकार ने टैक्स में बढ़ोतरी नहीं की है. केंद्र सरकार ने कीमत बढ़ाई हैं. केंद्र सरकार को ही दाम कम करना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खुद दो-दो पैसा जुटा रही है. केंद्र सरकार ने पहले ही हमारे साथ नाइंसाफी की है.
देश के 22 राज्यों में भाजपा -एनडीए की सरकार
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में देश के कुल 22 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें काबिज हैं. इन 22 राज्यों में से कई राज्यों में सीधे तौर पर बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं, और कुछ राज्यों में पार्टी अपने सहयोगियों (गठबंधन) के साथ सत्ता में शामिल है. जैसे दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश ,असम, नगालैंड, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, बिहार,आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मणिपुर और जगहों पाए विपक्ष की सरकारे हैं.

