बाघमारा में सरकारी जमीन से कोयला निकालने में फंसे बीसीसीएल के अधिकारी और आउटसोर्स कंपनी, जानिए पूरा मामला

    बाघमारा में सरकारी जमीन से कोयला निकालने में फंसे बीसीसीएल के अधिकारी और आउटसोर्स कंपनी, जानिए पूरा मामला

    धनबाद(DHANBAD): अवैध खनन करने वाले तो मनमर्जी कर ही रहे हैं, आउटसोर्सिंग कंपनियां भी निर्धारित  लीज होल्ड एरिया से आगे निकलकर कोयला काट रही है.  आउटसोर्स कंपनियों पर लगातार  नियम एव शर्तो के उल्लघन के आरोप लगते रहे है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. सरकारी भूमि पर कोयला काटने के आरोप में बीसीसीएल सिजुआ  क्षेत्र संख्या 5 के प्रोजेक्ट अफसर अनिल कुमार सिंह , आउटसोर्सिंग कंपनी राधा इंजीनियरिंग कंपनी के प्रबंधक मुट्ठु स्वामीऔर लाइजनर अश्विनी कुमार पांडेय की मिलीभगत से कोयल का अवैध खनन किया जा रहा था.  बाघमारा के  अंचलाधिकारी ने बताया  है कि बाघमारा अंचल के नगरी कला गांव में बीसीसीएल सिजुआ  क्षेत्र संख्या 5 के द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध खनन कर कोयला निकाला जा रहा था.

    पूर्व मुखिया ने की थी शिकायत 

    इस संबंध में पूर्व मुखिया नरेश महतो ने शिकायत की थी. उनकी शिकायत पर बाघमारा के अंचलाधिकारी ने जांच के लिए अंचल निरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया था.  जांच टीम ने  रिपोर्ट दी है कि सरकारी भूमि पर बीसीसीएल प्रबंधन सिजुआ  क्षेत्र संख्या 5 के प्रोजेक्ट ऑफिसर अनिल कुमार सिंह , आउटसोर्सिंग राधा इंजीनियरिंग कंपनी के प्रबंधक  एवं लाइजनर अश्वनी कुमार पांडे द्वारा अवैध उत्खनन किया जा रहा है.  सरकारी भूमि पर बिना लीज बंदोबस्ती के उत्खनन किया जा रहा था. जिससे  झारखंड सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था.  इस पर कार्रवाई करते हुए अंचलाधिकारी बाघमारा ने एफआईआर दर्ज कराई  है. आउटसोर्सिंग कंपनियों पर लगातार यह  आरोप लगते रहे हैं कि निर्धारित सीमा क्षेत्र से आगे निकलकर कोयल का उत्खनन कर रही है.  बाघमारा में जांच से इसकी पुष्टि हो गई है. 

    90% हिस्सेदारी आउटसोर्सिंग कंपनियों की

    बीसीसीएल के उत्पादन का लगभग 90% हिस्सेदारी आउटसोर्सिंग कंपनियों की है. आउटसोर्सिंग कंपनियां पोखरिया खदानों से उत्पादन करती है. इसके  इसके लिए बीसीसीएल कार्य आवंटन करती है. निगरानी का जिम्मा भी बीसीसीएल के पास होता है. यह अलग बात है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे बीसीसीएल का टारगेट तो पूरा हो जा रहा है लेकिन कोयला क्षेत्र का भविष्य क्या होगा, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है. भूमिगत खदानों से उत्पादन लगभग ठप है. इधर चार  भूमिगत खदानों को निजी क्षेत्र में देने का निर्णय हुआ है. देखना है भूमिगत खदानों से कोयला निकालने में निजी क्षेत्र हाथ डालते हैं अथवा नहीं. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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