गुमला: प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हुआ ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बुढ़वा महादेव! सुंदर वादियों में होने के बाद भी नहीं हुआ पूर्ण विकास

    गुमला: प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हुआ ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बुढ़वा महादेव! सुंदर वादियों में होने के बाद भी नहीं हुआ पूर्ण विकास

    गुमला(GUMLA): गुमला जिला का प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल देवगांव पूरी तरह से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. लोगों के आस्था और विश्वास का केंद्र होने के साथ ही प्रकृति की सुंदर वादियों के बीच में होने के बाद भी आज तक इस स्थल का सही रूप से विकास नहीं हो पाया है, जिसको लेकर लगातार सवाल उठा रहे है.गुमला जिला ऐसे तो कई प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की भूमि के रूप से अपनी पहचान बना चुका है,लेकिन सरकारी उदासीनता की वजह से यहां के कई स्थल ऐसे है, जो आज तक अपनी सही रूप से पहचान नहीं बना पाए है.

    भगवान शिव और गणेश जी का स्थल होने के बाद भी सही रूप से विकास नहीं हो पाया

    जिसमे एक स्थल देवगांव भी है, जो जिला मुख्यालय से 40 किमी की दूरी पर पालकोट प्रखंड के तपकरा पंचायत क्षेत्र में सुंदर वादियों में मौजूद है. जिसका अपना धार्मिक महत्व है. भगवान शिव और गणेश जी का स्थल होने के बाद भी ना तो इसका सही रूप से विकास हो पाया है ना ही यहां मूलभूत सुविधाये ही बहाल हो पाई है, जिसकी वजह से यहां आने वाले लोग भी लगातार सवाल खड़ा कर रहे है.

    बुढ़वा महादेव स्थल के रूप में प्रचलित इस स्थल की एक अपनी अलग खासियत है

    वहीं प्राचीन बुढ़वा महादेव स्थल के रूप में प्रचलित इस स्थल की एक अपनी अलग खासियत है. ऐसे जो भी धार्मिक स्थल देखने को मिलते है सभी किसी ना किसी मंदिर के रूप में है, लेकिन यह एक बड़े पहाड़ की गुफा में है.इस पहाड़ की परिधि कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा लगाना भी काफी मुश्किल है. लोग इस स्थान को देखने के लिए काफी दूरदराज से आते हैं , उन लोगों का मानना है कि इतना आकर्षक स्थल आज तक लोगों के ध्यान में ना आना निश्चित रूप से काफी दुर्भगय की बात है. इस स्थल पर जो मूर्तिया है वह काफी प्राचीन काल की है जिसे देखकर एक अलग ही अनुभूति होती है

    जितनी दूर तक नजर जाती है पहाड़ ही पहाड़ का हिस्सा नजर आता है

    वहीं दूसरे राज्यों से आये पर्यटकों की माने तो उन्होंने कई स्थानों का दर्शन किया है, लेकिन ऐसा आकर्षक स्थल नहीं देखा है, जितनी दूर तक नजर जाती है पहाड़ ही पहाड़ का हिस्सा नजर आता है.निश्चित रूप से इन सब स्थानों की बदहाल को देखकर झारखंड सरकार की पर्यटन स्थलों के प्रति उदासीनता का बोध होता है, सरकार इन स्थानों को सही रूप से विकसित करती तो ना केवल इन स्थलों को एक पहचान मिलती बल्कि इसके माध्यम से आसपास के दर्जनों परिवारों को रोजगार का बेहतर अवसर मिलता जिससे इलाके की  तस्वीर बदलती हुई नजर आती.

    रिपोर्ट-सुशील कुमार


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