पहली बार जेएमएम के संकट मोचक के रूप में सामने आए बसंत सोरेन, विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया, जानिए कौन है बसंत सोरेन

    पहली बार जेएमएम के संकट मोचक के रूप में सामने आए बसंत सोरेन, विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया, जानिए कौन है बसंत सोरेन

    दुमका(DUMKA):कुछ दिनों से झारखंड की राजनीति में एक नाम काफी तेजी से उभर कर सामने आया.कभी उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर तो कभी मंत्री पद को लेकर,कभी बीजेपी की ओर से सत्ताधारी दल झामुमो के इस विधायक को अपने पाले में कर लेने का दावा किया गया,लेकिन इस सबके विपरीत जमीन घोटाला मामले में जब हेमंत सोरेन को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा तो एकबारगी ऐसा लगा सत्ता झामुमो के हाथ से फिसल रही है. संकट की इस घड़ी में हेमंत सोरेन ने जिस व्यक्ति के कंधे पर गठबंधन के तमाम विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी सौंपी उसने अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन किया और साबित किया कि नेतृत्व क्षमता उनमें भी कूट कूटकर भरी है. वो व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि हेमंत सोरेन के अनुज, दिसोम गुरु शीबू सोरेन के छोटे बेटे और दुमका विधायक बसंत सोरेन हैं.

    बसंत सोरेन के समक्ष इम्तिहान अभी बाकी है

    होश संभालते ही बसंत सोरेन ने अपने पिता के संघर्ष को देखा, राजनीति की शिक्षा परिवार से मिली.परिवार के सदस्यों को विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री बनते देखा. छात्र जीवन में झामुमो छात्र मोर्चा का नेतृत्व किया. फिलहाल झामुमो युवा मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बनकर संगठन से युवाओं को जोड़कर मजबूती प्रदान कर रहे हैं.हम बात कर रहे हैं राजनीतिक संकट की इस घड़ी में संकट मोचक बनकर उभरे दुमका विधायक बसंत सोरेन की.रांची से लेकर हैदराबाद तक तमाम विधायकों को एक साथ रखा.झामुमो ने सत्ता की बागडोर चम्पई सोरेन को सौंपा.सदन में विश्वासमत हासिल कर चम्पई सोरेन के नेतृत्व में सरकार चल रही है, लेकिन बसंत सोरेन के समक्ष इम्तिहान अभी बाकी है.

    दावेदारों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी उनकी भी नाराजगी रहेगी

     विश्वासमत प्राप्त करने के बाद अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है. 16 फरवरी को विस्तार संभावित है. कई नए चेहरे अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.यह दावेदारी झामुमो और कांग्रेस दोनों दलों में है. जाहिर है अगर ऐसा हुआ तो पुराने चेहरा का पत्ता कटेगा, जिन दावेदारों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी उनकी भी नाराजगी रहेगी, सोरेन परिवार की बात करें तो दिसोम गुरु शीबू सोरेन की बड़ी पुत्रबधू सीता सोरेन की भी चाहत उपमुख्यमंत्री या फिर मंत्री बनने की होगी.इस स्थिति में बसंत सोरेन के समक्ष परिवार के साथ साथ सत्ताधारी दल के तमाम विधायकों को एकता के सूत्र में पिरोकर रखने की चुनौती है. इस चुनौती से विधायक बसंत सोरेन कैसे पार पाते हैं यह देखना दिलचस्प होगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि जिस विश्वास के साथ हेमंत सोरेन ने बसंत सोरेन के कंधे पर तमाम विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी सौंपी है उसमें वो सफल होकर अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता का परिचय देंगे.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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