माफिया की लड़ाई में विनोद सिंह को मारने के लिए धनबाद में पहली बार चमका था AK 47, दून बहादुर सिंह के बयान पर हुआ था केस

    माफिया की लड़ाई में विनोद सिंह को मारने के लिए धनबाद में पहली बार चमका था AK 47, दून बहादुर सिंह के बयान पर हुआ था केस

    धनबाद(DHANBAD) जिस तरह फिलहाल कोयलांचल की जमीन के भीतर आग लगी हुई है, इसी तरह एक समय यहां के माफिया के भीतर भी कोलियरियो पर कब्जा को लेकर आग लगी हुई थी. नतीजा यह था कि पांच देवों के नाम खूब चर्चे में थे. उन नामों में सूर्य देव, सत्यदेव, सकल देव, राजदेव, नौरंग देव के नाम शामिल थे. पांच देवों में दो की मौत तो बंदूक की गोलियों से हुई. बाकी तीन लोगो की स्वाभाविक मौत हुई. इसी टकराहट में सकलदेव सिंह के भाई विनोद सिंह की हत्या हुई थी. इस हत्या में पहली बार माफिया की लड़ाई में एके-47 का इस्तेमाल किया गया था.

    कैसे की गई थी विनोद सिंह की हत्या

    यह अलग बात है कि धनबाद एके-47 का नाम सुना और जाना तब था जब आतंकवादियों से लोहा लेते हुए जांबाज पुलिस अधीक्षक रणधीर प्रसाद वर्मा शहीद हो गए थे. यह समय 1991 का था. 15 जुलाई 98 को विनोद सिंह की हत्या में एके-47 का इस्तेमाल किया गया था .विनोद सिंह को बहुत चालाकी से कतरास के शहीद चौक पर बुलाया गया और फिर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया. उनका चालक भी मारा गया था. उनके भाई दून बहादुर सिंह के बयान पर प्राथमिक दर्ज हुई थी. इसी मामले में रामधीर सिंह को आजीवन कारावास की सजा हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी है. हालांकि इसके कुछ ही दिनों बाद 25 जनवरी "99 को विनोद सिंह के भाई सकलदेव सिंह की हत्या कर दी गई थी. सकलदेव सिंह और "कोयला किंग" रहे सुरेश सिंह संबंधी थे. सकलदेव सिंह की हत्या के बाद सुरेश सिंह काफी विचलित हुए और सिंह मेंशन के साथ उनकी चल रही अदावत को आगे बढ़ाते हुए विनोद सिंह हत्याकांड में सिंह मेंशन के लोगों को सजा दिलाने के लिए गवाहों को सुरक्षा देना शुरू किया. वह खुद गवाहों को सुरक्षा घेरे में लेकर कोर्ट जाते थे. इसी क्रम में 2004 में धनबाद शहर के बर टांड में सुरेश सिंह पर बमों से हमला हुआ था. उनकी गाड़ी बुलेटप्रूफ थी, इसलिए उनकी जान बच गई थी. इस मामले में लोअर कोर्ट ने रामधीर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और यह सजा हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है.

    रामधीर सिंह  की सजा पर हाई कोर्ट के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी

    अब रामधीर सिंह के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार हाई कोर्ट के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी. फरार रहने के बाद जब रामधीर सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया और जेल गए, उसके बाद उनके भतीजे पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या कर दी गई थी. उसे समय वह हजारीबाग जेल में बंद थे. इस घटना से वह काफी विचलित और परेशान भी हुए थे. रामधीर सिंह के जेल जाने के बाद सिंह मेंशन का कुनबा बिखर गया और लोग अलग-अलग रहने लगे. राजन सिंह का परिवार तो पहले से ही रघुकुल में रहता था लेकिन रामधीर सिंह और सूर्य देव सिंह का परिवार साथ-साथ था सिंह मेंशन में रहा करता था. लेकिन अब रामधीर सिंह का परिवार अलग इंदौरी में रहता है.

     रामधीर सिंह  सिंह मेंशन के "चाणक्य" 

    जनता मजदूर संघ को लेकर भी कई गुट बन गए हैं. रामधीर सिंह को हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने से धनबाद से लेकर उत्तर प्रदेश के बलिया के लोगों को निराशा हाथ लगी है. लोग कहते हैं कि अगर रामधीर सिंह को राहत मिलती तो सिंह मेंशन का कुनबा, जिस तरह बिखर रहा है, उस पर रोक लग सकती थी. रामधीर सिंह को सिंह मेंशन का "चाणक्य" भी कहा जाता है. बहरहाल देखना यह है कि आगे आगे होता है क्या.

    रिपोर्ट:धनबाद ब्यूरो


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