सवाल में है दम:  क्या संकल्प यात्रा के जरिए बाबूलाल मरांडी झारखंड के सांसदों और विधायकों का "वजन" माप रहे हैं

    सवाल में है दम:  क्या संकल्प यात्रा के जरिए बाबूलाल मरांडी झारखंड के सांसदों और विधायकों का "वजन" माप रहे हैं

    धनबाद(DHANBAD): भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की संकल्प यात्रा में बुधवार को झरिया में कहा गया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंद हैं. फिर यहीं से सवाल खड़ा होता है कि क्या पूरे राज्य में बाबूलाल मरांडी की संकल्प यात्रा का कोई विशेष  मतलब है. क्या बाबूलाल मरांडी संकल्प यात्रा के जरिए झारखंड के सांसदों और विधायकों के पास कितना जन समर्थन है ,इसको जानने समझने पहुंच रहे हैं.

    समझिए राजनीतिक दांव-पेंच 

    2024 का चुनाव चाहे लोकसभा का हो अथवा विधानसभा का, बहुत सामान्य नहीं होगा. मध्य प्रदेश का उदाहरण सबके सामने है. जहां  केंद्रीय मंत्री और सांसदों को भी विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उतार दिया गया है. तो क्या संकल्प यात्रा के जरिए बाबूलाल मरांडी भी स्थिति को समझ रहे हैं. और अपनी कोई कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट आला कमान को भेजेंगे.

    धनबाद में पांच विधानसभा क्षेत्र में बाबूलाल मरांडी की संकल्प यात्रा पूरी 

    राजनीतिक पंडित इस संभावना से पूरी तरह से इनकार नहीं कर रहे हैं. धनबाद में पांच विधानसभा क्षेत्र में बाबूलाल मरांडी की संकल्प यात्रा पूरी हो गई है. सिर्फ बाघमारा बचा हुआ है. वहां के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो की माता का निधन हो गया था .इस वजह से संकल्प यात्रा की तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है. जो भी हो पांच विधानसभा क्षेत्र में समर्थन के थर्मामीटर में कितना पारा चढ़ा इसका आकलन तो हो ही गया है. धनबाद की बात की जाए तो चार  अभी भाजपा के पास है. ढुल्लू महतो भाजपा के टिकट पर दूसरी बार बाघमारा से विधायक हैं. तो राज सिन्हा धनबाद विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार भाजपा के विधायक हैं.

    चुनाव में टिकट को लेकर अभी से कयास लगाए जा रहे हैं

    भाजपा की टिकट पर निरसा से अर्पणा सेनगुप्ता पहली बार जीती हैं. सिंदरी से भी इंद्रजीत महतो पहली बार चुनाव जीते हैं. हालांकि वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. ऐसे में उनकी पत्नी सिंदरी विधानसभा क्षेत्र की कमान संभाले हुए हैं. झरिया की बात की जाए तो पूर्व विधायक संजीव सिंह  जेल में है. इस वजह से 2019 में भी उनकी पत्नी रागिनी सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस बार भी वह झरिया सीट के लिए प्रबल दावेदार हैं. बहरहाल जो भी हो, लेकिन चुनाव में टिकट को लेकर अभी से कयास लगाए जा रहे हैं. सर्वे कराए जा रहे है.संगठन को भी इस काम में सक्रिय कर दिया गया है. मध्य प्रदेश  के बाद तो राजनीतिक पंडित भी इसको स्वीकार करते हैं कि 2024 के चुनाव में भाजपा विनिंग कैंडिडेट पर ही दांव लगाएगी. चाहे इसके लिए उसे कोई भी प्रयोग करना पड़े.

    रिपोर्ट:धनबाद ब्यूरो


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