32 करोड़ का हॉस्टल बनकर है तैयार फिर भी भाड़े के घरों में रहने को मजबूर छात्र, जानिए क्या है पूरा मामला 

    32 करोड़ का हॉस्टल बनकर है तैयार फिर भी भाड़े के घरों में रहने को मजबूर छात्र, जानिए क्या है पूरा मामला 

    धनबाद(DHANBAD) : 32 करोड़ की लागत से हॉस्टल तो बनकर तैयार है लेकिन जिनके लिए यह हॉस्टल बना है, वह भाड़े के घर में रहने को मजबूर है.  धनबाद के SNMMCH पीजी ब्लॉक कैंपस में पारा मेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए यह भवन तैयार किया गया है.लेकिन फाइलों की उलझन में  भवन फंस गया है. इसका लाभ छात्र-छात्राओं को कब मिलेगा, यह बताने से सभी बचना चाहते हैं. इधर, बच्चों को रहने में परेशानी हो रही है. उन्हें अधिक पैसे भी खर्च करने पड़ रहे हैं. कमजोर आर्थिक स्थिति वाले तो और परेशान हैं लेकिन वह करें भी तो क्या करे. पढ़ाई तो करनी ही है.  

    परिसर से बाहर भाड़े के घर में रहते हैं बच्चे 

    धनबाद के SNMMCH में हर साल 60 सीटों पर पारा मेडिकल छात्रों का एडमिशन लिया जाता है.  2 साल के इस पढ़ाई में एक साथ एक सौ से 120 बच्चे रहते हैं. इन्हें हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती. कैंपस के बाहर किराए के मकान में रहना पड़ता है. इन्हीं छात्रों के लिए पीजी कैंपस में राजकीय पारा मेडिकल संस्थान समेत छात्र -छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास का निर्माण कराया गया है. दोनों छात्रावास 80-80 बेड के हैं. निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है.  छोटी-छोटी कमियों के कारण मामला अटका हुआ है. मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इन कमियों का हवाला देकर बिल्डिंग को हैंड ओवर नहीं ले रहा है, वहीं काम करने वाली एजेंसी भी जल्द से जल्द काम खत्म कर हैंडओवर करने में कोई रूचि नहीं दिखा रही है. 

    बिजली कनेक्शन ने फंसा रखा है पेंच 
     
    सूत्रों के अनुसार भवन में बिजली कनेक्शन का भी पेंच फंसा हुआ है. निर्माण करने वाली एजेंसी ने अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं किया है. हालांकि, बिजली के लिए ट्रांसफार्मर आकर पड़ा हुआ है बावजूद रुचि नहीं दिखाई जा रही है. इस वजह से प्रबंधन बिल्डिंग को हैंड ओवर नहीं ले रहा है. दूसरी ओर एजेंसी बिना कनेक्शन के ही हैंड ओवर देने का दबाव बना रही है. पिछले 5 वर्षों से छात्रावास का निर्माण हो रहा था. 1918 में निर्माण कार्य शुरू हुआ. कोरोना  के कारण भी काफी दिनों तक मामला आगे नहीं बढ़ा, कोरोना तो खत्म हो गया लेकिन भवन अभी भी तैयार होने के बाद भी बेकार पड़ा हुआ है. धनबाद में सिर्फ एक भवन का मामला नहीं है, ऐसे ढेरों बिल्डिंग है, जो बनकर तैयार हैं लेकिन छोटी-छोटी कमियों के कारण बेकार पड़ी हुई है.
    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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