गुमला की बेटी ने यूथ गेम में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय एथलीट में दर्ज कराया नाम , पढ़ें पूरी खबर 

     गुमला की बेटी ने यूथ गेम में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय एथलीट में दर्ज कराया नाम , पढ़ें पूरी खबर 

     रांची (RANCHI ): घाघरा की बेटी सुप्रीति ने फिर से झारखंड का मान बढ़ाया है. खेलो इंडिया यूथ गेम में गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ एथलीट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज किया. हरियाणा के पंचकुला में चल रहे खेलो इंडिया यूथ गेम में घाघरा प्रखंड के बुरहु ग्राम निवासी सुप्रिती कच्छप ने 3000 मीटर दौड़ 9 मिनट 46 सेकंड में पूरा करते हुए अंडर-18 वर्ग में एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया है. यहां बता दें कि इससे पूर्व यह रिकॉर्ड सीमा कुमारी के नाम था, उन्होंने 2017 में 9 मिनट 50 सेकंड में दौड़ पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. जिस रिकॉर्ड को सुप्रीति ने प्रतियोगिता में तोड़ते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज किया है. सुप्रीति ने 3000 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया. सुप्रिती की इस सफलता व झारखंड को गोल्ड मेडल दिलाने के बाद घाघरा वासियों में खुशी की लहर है. सभी सुप्रीति व उसकी मां बालमती देवी को बधाई व शुभकामना दे रहे है.

    सुप्रीति का चयन अंडर 20 वर्ल्ड कप चैंपियनशिप के लिए हुआ चयन 
     

    सुप्रीति कच्छप ने खेलो इंडिया प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल  हासिल करना केवल अपने परिवार और गुमला का नाम रोशन किया बल्कि पूरे झारखंड को अपनी प्रतिभा से गौरान्वित करने का काम किया है. जिसे  लेकर उसके पूरे परिवार में खुशी का माहौल है वही सुप्रिति की माँ से मिलकर उन्हें बधाई देने के लिए जिला के प्रशासनिक पदाधिकारी भी पहुँचे जिन्होंने कहा कि सुप्रिति की प्रतिभा अन्य लोगो के लिए प्रेरणा स्रोत है.

    गुमला खेलनगरी के लिए प्रसिद्ध 

    ऐसे तो सभी जानते हैं कि सम्मिलित बिहार के समय से ही गुमला जिला खेल नगरी के रूप में जानी जाती रही है. यहां के खिलाड़ी ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के काम किया है. लेकिन हाल के दिनों में सरकारी उदासीनता के कारण जिला की खेल नगरी के रूप में पहचान काफी कम होती जा रही है. लेकिन इसके बाद भी हौसला के बल पर कई लोग अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं,जो साबित करता है कि बिना किसी सहायता के भी बहुत कुछ कर सकती है. सुप्रिति की माँ बलमती देवी की मानें तो सुप्रीति को शुरू से ही खेल में रुचि थी. उसके  बाद जब वह चैनपुर के नुकरुदीपा स्कूल में गयी तो वहां भी उसे खेल का बेहतर अवसर मिला उनकी मानें तो 2017 से ही सुप्रीति लगातार गोल्ड मैडल पा रही है.जब गोल्ड मैडल मिला तो काफी खुशी हुई. वही जिला खेल पदाधिकारी ने कहा कि सुप्रिति निश्चित रूप से एक प्रतिभावान बच्ची है जो अभाव के बीच इस मुकाम को हासिल की है उनका पूरा प्रयास होगा कि सुप्रिति को हर सम्भव सहायता मिले।

    उपायुक्त ने घर जाकर किया सम्मानित 

    वही सुप्रीति को मिली सफलता को लेकर जिला के प्रशासनिक पदाधिकारी भी काफी उत्साहित हैं. जिला के डीसी सुशांत गौरव के निर्देश पर घाघरा के अंचलाधिकारी ऋतुराज कुमार सुप्रीति के गांव जाकर उसकी माता को गुलदस्ता देकर सम्मानित किया साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रिति ने साबित किया है कि दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है. वही सुप्रीति की माँ ने लोगो से अपील को है कि बेटा बेटी में कोई फर्क ना करे और दोनों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करे. निश्चित रूप से सुप्रीति की कड़ी मेहनत की जितनी भी सराहना की जाय कम है, बस अब भी सरकार को सोचना चाहिए कि उनके बिना सहयोग का जब इस तरह से बेटियां सम्मान पा रही है तो अगर उनकी ओर से सहायता मिल जाय तो गुमला की खिलाड़ी विदेशों  तक अपनी प्रतिभा का डंका बजा सकती है.

    रिपोर्ट : सुशील कुमार सिंह (गुमला )


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