बड़ी खबर : एक बार फिर लोगों की पॉकेट पर बढ़ा बोझ, कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में भारी उछाल

    नए वित्त वर्ष 2026-27 के आगाज के साथ ही भारत में LPG सिलेंडरों की कीमतों में बदलाव ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए चिंता बढ़ा दी है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-इजरायल तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेजी का असर अब देश के बाजार में दिखने लगा है.

    बड़ी खबर : एक बार फिर लोगों की पॉकेट पर बढ़ा बोझ, कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में भारी उछाल

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): नए वित्त वर्ष 2026-27 के आगाज के साथ ही भारत में LPG सिलेंडरों की कीमतों में बदलाव ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए चिंता बढ़ा दी है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-इजरायल तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेजी का असर अब देश के बाजार में दिखने लगा है. तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों के दामों में ₹195 से ₹218 तक की भारी बढ़ोतरी की है, जबकि 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम ₹51 बढ़ाए गए हैं.

    दिल्ली और मुंबई में 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम ₹195.5 बढ़कर दिल्ली में ₹2078.50 और मुंबई में ₹2031 हो गए हैं. वहीं, कोलकाता में सबसे बड़ी उछाल के साथ ₹218 की बढ़ोतरी हुई और अब इसका मूल्य ₹2208 हो गया है. चेन्नई में ₹203 की वृद्धि के बाद यह सिलेंडर ₹2246.50 में उपलब्ध होगा. इस बढ़ोतरी ने रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों की जेब पर बड़ा बोझ डाल दिया है. वहीं रांची में सिलेंडर के दाम ₹ 2258 हो गए हैं. 

    हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत दी गई है. घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रखते हुए इसे दिल्ली में ₹913 पर रखा गया है. इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर पर स्थिर है.

    विशेषज्ञों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों का असर खास तौर पर रेस्तरां, होटल और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, क्योंकि इनका इस्तेमाल अधिक मात्रा में खाना बनाने और व्यवसाय चलाने के लिए होता है. वहीं घरेलू सिलेंडरों पर फिलहाल कोई बदलाव नहीं होने से आम परिवारों को कुछ राहत मिली है.

    सरकारी तेल कंपनियों ने ग्राहकों से आग्रह किया है कि वे घरेलू सिलेंडरों की खरीद में किसी तरह की हड़बड़ी न करें और व्यावसायिक सिलेंडरों के लिए नई कीमतों के अनुसार अपने बजट में समायोजन करें. इस बढ़ोतरी ने ऊर्जा की कीमतों और वैश्विक तेल बाजार के प्रभाव को सीधे देश के व्यवसायों और उद्योगों पर उजागर कर दिया है.

    इस वित्त वर्ष के शुरुआती बदलाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक तेल संकट और राजनीतिक तनाव सीधे घरेलू बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत का प्रावधान रखा है.


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