दुमका : डीआरएम ने दुमका रेलवे स्टेशन और आस पास के जगह का किया निरीक्षण, कहा जल्द ही सेंटिंग यार्ड का भी होगा निर्माण

    दुमका : डीआरएम ने दुमका रेलवे स्टेशन और आस पास के जगह का किया निरीक्षण, कहा जल्द ही सेंटिंग यार्ड का भी होगा निर्माण

    दुमका (DUMKA) : आसनसोल रेल डिवीज़न के डीआरएम परमानंद शर्मा और हावड़ा रेल डिवीज़न के डीआरएम मनीष जैन दुमका रेलवे स्टेशन पहुंचे. दोनों डीआरएम द्वारा रेलवे स्टेशन के आस पास का स्थल निरीक्षण किया गया. आसनसोल रेल डिवीज़न के डीआरएम द्वारा कोल डंपिंग यार्ड का भी निरीक्षण किया गया. मीडिया से बात करते हुए आसनसोल रेल डिवीज़न के डीआरएम परमानंद शर्मा ने कहा कि दुमका रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण की योजना है. जिस स्थल तक विस्तारीकरण होना है, वह हावड़ा डिवीज़न में आता है. उस स्थल को हावड़ा डिवीज़न से आसनसोल डिवीज़न में स्थानांतरित किया जाना है. वैसे तो दोनों डिवीज़न के बीच सहमति बन चुकी है. एक बार स्थल निरीक्षण के उद्देश्य से दोनों डीआरएम पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि विस्तारीकरण के तहत सेंटिंग यार्ड का निर्माण किया जाएगा ताकि रेलवे को गति प्रदान की जा सके. 

    सोसाइटी के सदस्यों ने सौंपा ज्ञापन 

    वहीं आसनसोल रेल डिवीज़न के डीआरएम को सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने एक ज्ञापन सौपा जिसमें कोल डंपिंग यार्ड से हो रहे प्रदूषण के कारण इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की गई. लेकिन डीआरएम ने स्पस्ट कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए रेलवे द्वारा हर संभव कदम उठाया गया है. प्रदूषण की कोई समस्या नहीं है. समय के साथ प्रदूषण को लेकर लोगों की भ्रांतियां दूर हो जाएगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि डंपिंग यार्ड को अन्यत्र स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है. इस पर सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई. अधिकारियों पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दे डाली.

    2022 में हुई थी डंपिंग यार्ड की शुरुवात 

    सितंबर 2022 से दुमका रेलवे स्टेशन से कोल डंपिंग यार्ड की शुरुवात की गई है. कार्यकारी एजेंसी को दो दो महीने के सेवा विस्तार के बाद एक बार फिर 3 महीने का विस्तार दिया गया है. डंपिंग यार्ड शुरू होने के पूर्व से ही लोग इसका विरोध कर रहे है. सिविल सोसाइटी के नेतृत्व में चरणबद्ध आंदोलन की शुरुवात हो चुकी है. जिस तरह रेलवे और स्थानीय लोग अपनी अपनी जिद पर अड़े है उसे सुखद नहीं कहा जा सकता. विरोध का स्वरूप कभी भी जन आंदोलन का रूप ले सकता है. इसलिए जरूरत है बीच का रास्ता अपनाने की ताकि क्षेत्र में विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हुए बगैर विकास का मार्ग प्रसस्त हो सके.

    रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका


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