रिम्स का ट्रामा सेंटर : दावे तो बड़े-बड़े, हकीकत में ओमिक्रॉन से बचाव के लिए कितना है मुस्तैद !

    रिम्स का ट्रामा सेंटर : दावे तो बड़े-बड़े, हकीकत में ओमिक्रॉन से बचाव के लिए कितना है मुस्तैद !

    रांची (RANCHI) राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के रूप में RIMS जाना जाता है. कोरोना के नए वैरिएंट्स ओमिक्रॉन के तीन केस अपने देश में मिल चुके हैं. ऐसे में रिम्स अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया गया है. THE NEWS POST की टीम ने जब ट्रामा सेंटर का जायजा लिया तो एक गार्ड के भरोसे रिम्स का ट्रॉमा सेंटर मिला. उसके अंदर मीडियाकर्मी को भी जाने की अनुमति नहीं थी. एक भी डॉक्टर और नर्स ट्रामा सेंटर के अंदर ड्यूटी में मौजूद नहीं मिले. THE  NEWS  POST की टीम ने  ट्रॉमा सेंटर के हेड DR. BHATACHARJEE  से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फ़ोन कॉल को रिसिव भी नहीं किया और कॉल बैक भी नहीं किया. ऐसे में कागजों पर ही राज्य सरकार दावे कर रही है. हकीकत में नए वैरिएंट्स को लेकर तैयारियां कितनी पुख्ता हैं, वो तो आने वाला समय ही बता पाएगा.

    कागजों पर तैयार हैं ट्रॉमा सेंटर 

    ट्रॉमा सेंटर के अंदर 100 से अधिक बेड लगाए गए हैं, ऑक्सीजन पाइपलाइन भी लगाए गए हैं. बाहर में ऑक्सीजन प्लांट लगा हुआ है. ट्रामा सेंटर में एक भी संक्रमित या लक्षण वाले मरीज को भर्ती नहीं किया गया है. जीनोम सिक्वेंसिंग को लेकर सरकार कितनी सजग है, यह भी देखने वाली बात होगी. रेलवे स्टेशन पर भी RTPCR और RAT के माध्यम से यात्रियों का स्वाब लिया जा रहा है, पर बहुतायत यात्री बिना टेस्ट दिए ही बाहर जा रहे हैं. एयरपोर्ट पर भी सभी यात्रियों का RTPCR  टेस्ट नहीं हो पा रहा है. गाइडलाइन्स के मुताबिक जिनके पास वैक्सीन का सर्टिफिकेट है,या 72 घंटे का RTPCR  रिपोर्ट है वो बाहर निकल रहे हैं. विदेश से आये हुए यात्री का भी पूरा रिपोर्ट नहीं दर्ज हो पा रहा है. संभावित तीसरी लहर से ऐसे में कैसे ओमिक्रॉन से अछूता रह सकता है झारखण्ड.

    रिपोर्ट:  रंजना कुमारी( रांची ब्यूरो )


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