एक अच्छी पहल : चाइल्ड लाइन ने दो महीने बाद पिता को जब लापता पुत्री से मिलाया तो दोनों के आखों में छलक आए आंसू

    एक अच्छी पहल : चाइल्ड लाइन ने दो महीने बाद पिता को जब लापता पुत्री से  मिलाया तो दोनों के आखों में छलक आए आंसू

    गिरिडीह के  तिसरी चाइल्ड लाइन ने 2 महीने के बाद जब पिता को पुत्री से मिलाया तो पुत्री और पिता के आंखों में छलक आए आंसू।।

    गिरीडीह के तीसरी में 2 महीने के बाद जब पुत्री अपने पिता से मिली तो दोनों के आंखों से अश्रुओं की धार बहने लगी ।  एक दिन पिता की दयनीय स्थिति से दुःखी होकर  खुशबू   काम करने के लिए दिल्ली चली गई  लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि शहर में मानवीय संवेदनाओं का कोई मतलब नहीं है । दिन भर काम कराना और फिर यातना सहना दिनचर्या बन गया ।  गिरिडीह जिले के तिसरी लोकाय नायनपुर के गंजवा गांव की किशोरी खुशबू उर्फ तालको ट्टुडू  बीते 2 अगस्त को गाँव सर दिल्ली  पहुँची फिर वो आनंद विहार कि एक घर में चौका बर्तन का काम करने लगी , कुछ दिनों तक सब ठीक चला फिर शुरू हुआ यातनाओं का दौर छोटी छोटी बातों पर गली गलौज ,  मारपीट , दो महीने बीतते बीतते जीना  मुहाल हो गया अब उसे घर और अपनों की याद सताने लगी ।  नारकीय जीवन से  अजीज आकर एक दिन वो वहाँ से भाग निकली , किसी से पूछ कर वो आंनद विहार स्टेशन पहुँची फिर वो झारखंड जाने वाली ट्रेन में सवार घर के लिए चल पड़ी । रास्ते से अनजान वो साहिबगंज पहुँच गई जहाँ  चाइल्डलाइन की टीम की नज़र उस पर पड़ी और उसे सुधार गृह भेज दिया । पूछताछ के क्रम में खुशबू ने अपनी आपबीती अधिकारियों को बताई  जिसके बाद सुधार गृह ने गिरिडीह सीडब्ल्यूसी से संपर्क किया तत्पश्चात टीम द्वारा किशोरी की फोटो उसके पिता को दिखाया गया।  पिता ने अपनी पुत्री खुशबू को पहचान लिया जिसके बाद शनिवार को साहिबगंज सुधार गृह से किशोरी को उसके पिता शुकरा टुड्डू को सौंप दिया गया ।  खुशबू  जैसे ही अपने पिता को देखी उसके आंखों से अश्रुओं की धार छलकने लगा पुत्री को रोता देख  पिता से भी नहीं रहा गया वो भी बैचेन होकर बिलख पड़ा । पिता और पुत्री के इस मिलन पर हर किसी की आंखे नम थी ।

    रिपोर्ट - दिनेश कुमार , गिरिडीह 


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