सीएम पद से कट रहा सम्राट चौधरी का नाम ? क्यों शिवराज सिंह चौहान को ही बनाया गया ऑब्जर्वर, पढ़िये

    सीएम पद से कट रहा सम्राट चौधरी का नाम ? क्यों शिवराज सिंह चौहान को ही बनाया गया ऑब्जर्वर, पढ़िये

    पटना (PATNA): बिहार में खूब हलचल है. यह हलचल पिछले 72 घंटे से  अधिक तेज हुई है. जब से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान नाम पर्यवेक्षक के रूप में नामित हुआ है, भाजपा में हलचल कुछ अधिक है. अभी तक यही माना जा रहा था कि विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी को ही आगे बढ़ाया जाएगा. लेकिन आज क्या होगा, यह प्रश्न  बना हुआ है.भाजपा नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को इसलिए बिहार का पर्यवेक्षक बनाया गया है, कि उनको सामने रखकर  भाजपा में उठने वाले किसी भी विवाद को रोका जा सके. आपको याद होगा 2023 में शिवराज सिंह चौहान को खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी की" कुर्बानी "देनी पड़ी थी. और मोहन यादव के लिए रास्ता क्लियर करना पड़ा था. 

    बिहार भाजपा के अंदर फिलहाल तनातनी चल रही है 

    पार्टी में कैसे किसी बात पर राय बनानी होती है, इसका अनुभव शिवराज सिंह चौहान के पास है. 16 साल  से अधिक समय तक वह मुख्यमंत्री रहे. भाजपा मध्य प्रदेश में उनको आगे कर चुनाव लड़ी, लेकिन मुख्यमंत्री किसी दूसरे को बना दिया गया. पटना से मिल रही खबर के मुताबिक बिहार भाजपा के अंदर फिलहाल तनातनी चल रही है. इसी को छुपाने के लिए दिल्ली में जो बैठक प्रस्तावित थी, उसको रद्द कर दिया गया और कहा गया कि पटना में ही पर्यवेक्षक की मौजूदगी में नए सीएम का नाम विधायक तय करेंगे. 

    भीतरी भीतर असंतोष भी है                                             

    अगर दिल्ली में नाम तय होता और पटना में विरोध शुरू हो सकता था. फिर समस्या उत्पन्न हो सकती थी.बताया जा रहा है कि बिहार बीजेपी में ऊपर से तो सब कुछ ठीक दिख रहा है, लेकिन भीतरी भीतर असंतोष भी है. दिल्ली में प्रस्तावित बैठक के पहले भाजपा को इसके कुछ संकेत भी मिले, जिस वजह से दिल्ली बैठक को रद्द कर दिया गया. बिहार में अभी जो स्थिति है, उसके अनुसार सम्राट चौधरी भाजपा विधायक दल के नेता हैं, विजय कुमार सिन्हा भाजपा विधायक दल के उप नेता हैं. कायदे से तो विधायक दल के नेता को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए ,यानी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री होना चाहिए. सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का समर्थन भी मिलता दिख रहा है. 

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सम्राट चौधरी के नाम पर सहमत नहीं
     
    लेकिन किसी न किसी वजह से बाजी पलटती दिख रही है. सूत्रों पर भरोसा करें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सम्राट चौधरी के नाम पर सहमत नहीं है. उनका राजनीतिक प्रशिक्षण राजद की पाठशाला में हुआ है. भाजपा में आए अभी उन्हें लगभग 9 साल हुए हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि मंत्री पद तो ठीक है, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री पद देना बहुत जल्दबाजी होगी. 

    मुख्यमंत्री को लेकर शिवराज सिंह चौहान की चर्चा

    महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर शिवराज सिंह चौहान की चर्चा तो हो ही गई है, दिल्ली में भी 2025 में जब भाजपा को बहुमत मिला तो हर तरफ प्रवेश वर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा चल रही थी. सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा था कि प्रवेश वर्मा ने ही  अरविंद केजरीवाल को हराया था. भाजपा के लिए बड़ी बात थी. प्रवेश वर्मा भी निश्चिंत थे. लेकिन भाजपा   निर्णय कुछ और कर दिया. फिर रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बन गई .

    शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाया गया है

    सूत्र बता रहे हैं कि नए नेता के चुनाव में पटना में असंतोष नहीं दिखे,  इसके लिए ही शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाया गया है. सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि शिवराज सिंह चौहान के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी आज पटना पहुंच रहे हैं. मतलब राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी एक मानसिक दबाव भी भाजपा विधायकों पर रहेगा.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो                              


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