टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन नवीन की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जनसुराज की नजर है. हो सकता है कि चुनाव नहीं लड़ने का आरोप झेल रहे जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकते है. अगर जनसुराज को सफलता मिलती है तो, यह बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट हो सकता है. लेकिन बांकीपुर भाजपा का गढ़ है, इसलिए क्या होगा, यह कहना अभी जल्दवाजी होगी. प्रशांत किशोर का दावा है कि बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को उनकी पार्टी हरा देगी. मतलब निकाला जा रहा है कि बांकीपुर विधानसभा से प्रशांत किशोर उपचुनाव चुनाव लड़ेंगे.
चुनाव लड़ने के लिए प्रशांत किशोर पार्टी की पहली पसंद है
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि वहां से चुनाव लड़ने के लिए प्रशांत किशोर पार्टी की पहली पसंद है. लेकिन अभी इस पर निर्णय लिया जाना है. उन्होंने कहा कि बांकीपुर में जनसुराज पार्टी ही भाजपा को पराजित कर सकती है. पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने जनसुराज की घोषणा पत्र को चुरा लिया था. अब अगर हमारे दल का एक भी विधायक जीत जाएगा, तो असली विपक्ष जनसुराज पार्टी ही साबित होगी. बता दे कि बिहटा में जनसुराज का आश्रम तैयार हो रहा है. अब प्रशांत किशोर वही रहेंगे और वहीं से बिहार की राजनीति को बदलने का प्रयास करेंगे.
बांकीपुर उप चुनाव होते-होते वर्तमान सरकार के 8-9 महीने हो जाएंगे
कहा जा रहा है कि बांकीपुर उप चुनाव होते-होते वर्तमान राज्य सरकार के 8-9 महीने हो जाएंगे, इसलिए यह चुनाव महत्वपूर्ण हो सकता है. क्योंकि इस सरकार के पहले वर्ष का जनमत संग्रह भी माना जाएगा. यह अलग बात है कि विधानसभा चुनाव में भी जनसुराज पार्टी ने लगभग सभी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. जनसुराज ने किसी दल से गठबंधन नहीं किया था. लेकिन जनसुराज को एक भी सीट नहीं मिली. बिहार में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला, लेकिन आगे चलकर जिसके नाम पर वोट मांगे गए वह नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिए और राज्यसभा में चले गए.
बांकीपुर सीट भाजपा का गढ़ कहा जाता है
बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना है. सम्राट चौधरी के भी मुख्यमंत्री बने एक महीने से अधिक हो गए है. ऐसे में सरकार बड़े-बड़े फैसले ले रही है. अपराधियों के खिलाफ बिहार पुलिस "आफत" बनकर टूट रही है. ऐसा लग रहा था कि एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद बिहार की राजनीति कुछ दिनों के लिए ठंडी पड़ जाएगी, लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा है. सरकार के नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी को मिलाकर 6 महीने पूरे होने के बाद विपक्षी दल सवालों का पुलिंदा लेकर जनता के बीच जा रहे हैं. बात-बात में राजनीति हो रही है. देखना है कि बांकीपुर सीट पर उपचुनाव कब होता है और क्या सचमुच इस सीट पर भाजपा को परेशानी होगी? क्योंकि बांकीपुर सीट बीजेपी का गढ़ माना जाता है.

