बिहार विधान परिषद : पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे को मिलेगी पिता की सीट या किसी दूसरे का होगा कब्ज़ा !!

    बिहार विधान परिषद : पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे को मिलेगी पिता की सीट या किसी दूसरे का होगा कब्ज़ा !!

    टीएनपी डेस्क :  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट किसके खाते में जाएगी,बेटे को मिलेगी या किसी दूसरे को.  इस सीट को लेकर एनडीए और महागठबंधन का क्या रुख रहता है, इस पर सबकी नज़रें रहेगी।  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पद त्यागने की वजह से सीट खाली हुई है.  इसके अलावा जिन नेताओं का कार्यकाल पूरा होने के कारण विधान परिषद की सीट खाली हुई है.  उनमें डॉक्टर कुमुद वर्मा, प्रोफेसर गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक ,भीष्म साहनी, भगवान सिंह कुशवाहा, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और  सुनील कुमार सिंह के नाम शामिल हैं. 

     राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर से इंकार नहीं

     इन सभी सीटों पर निर्वाचन के लिए राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर होगी, इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.  निर्वाचन आयोग ने नौ सीटों पर  चुनाव और एक सीट  पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है.  इन सभी सीटों के लिए बिहार की राजनीति में कई समीकरण बनते और बिगड़ते दिखेंगे, हालांकि पहले से ही उम्मीदवारी को लेकर लॉबिंग  चल रही थी. लेकिन घोषणा के बाद लॉबिंग  और तेज हो गई है.  28 जून को विधान परिषद की 9 सीट  खाली हो रही है.  एक सीट नीतीश कुमार का है.  इनमें से फिलहाल 5 सीट जदयू के पास है, बीजेपी के पास दो और राजद के पास दो हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस के पास है.  इसलिए  एनडीए में भी खींचतान हो सकती है. 

    दो नेताओं के बेटे की कुर्सी को भी बचाएगा यह चुनाव 

     जदयू कम से कम चाहेगा कि वह अपना पुराना रिकॉर्ड बरकरार रखें, जबकि भाजपा भी आगे बढ़ने की कोशिश करेगी।  दूसरी ओर राजद  फिलहाल बिहार की राजनीति में हाशिये  पर है.  उसे भी बहुत कुछ करना होगा।  वैसे 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिली थी.  इसलिए  कहा जा सकता है कि एनडीए के  उम्मीदवारों के लिए आसानी हो सकती है.  18 जून को मतदान होगा और उसी दिन काउंटिंग भी होगी।  एनडीए गठबंधन में चिराग पासवान की पार्टी, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी तथा जीतन राम मांझी की पार्टी भी शामिल है और सभी एमएलसी चाहती है.  एनडीए  में उम्मीदवारों का चयन बहुत आसान नहीं होगा।  पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी एमएलसी बनने का इंतजार होगा, क्योंकि 6 महीने के भीतर उन्हें किसी सदन का सदस्य बनना होगा।  इस तरह उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश भी इस रेस में रहेंगे, क्योंकि उन्हें भी निशांत कुमार की तरह किसी सदन  का सदस्य  6 महीने में बनना  होगा।



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