फिर से बाहर आया कोटा का जिन्न! महिला आरक्षण पर सोनिया गांधी के साथ खड़ी नजर आने लगी उमा भारती और अनुप्रिया पटेल

    फिर से बाहर आया कोटा का जिन्न! महिला आरक्षण पर सोनिया गांधी के साथ खड़ी नजर आने लगी उमा भारती और अनुप्रिया पटेल

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK)-लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर जारी डिबेट से इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि इस बार भी इसकी राह आसान नहीं होने वाली है, खुद भाजपा का दावा है महिला आरक्षण प्रदान करने के पहले सरकार को परिसीमन का करवाना होगा और परिसिमन के लिए जनगणना जरुरी शर्त होगी, जबकि फिलहाल सरकार की तरफ से जनगणना के लिए कोई पहलकदमी होती नजर नहीं आ रही है. इस हालत में महिला आरक्षण बिल महिलाओं का अधिकार देने के बजाय एक चुनावी स्टंट ज्यादा नजर आने लगा है और यदि यह बिल पास भी हो गया तो 2029 के पहले महिलाओं को आरक्षण प्रदान करना मुश्किल होगा.  

    सत्ता पक्ष से उठी दलित पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग

    लेकिन इसके साथ ही दलित आदिवासी और पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए महिला आरक्षण  के अन्दर अलग से कोटा बनाने की मांग एक बार फिर से तेज होती नजर आने लगी है, और यह विवाद कोई नया नहीं है, हर बार महिला आरक्षण का विरोध इसी सब कोटे के आधार पर किया जाता रहा है, लेकिन इस बार यह मांग महज विपक्ष की ओर से नहीं खुद सत्ता पक्ष से तेज हुई है, भाजपा के अन्दर से उमा भारती ने इसकी मांग करते हुए साफ कर दिया है कि बगैर दलित आदिवासी, पिछडे और अतिपिछड़ों का कोटा तय किये सिर्फ महिलाओं को आरक्षण प्रदान करना, आदिवासी दलित और आदिवासी समाज के साथ एक बड़ी ज्यादती होगी, उमा भारती की इस राय में आगे बढ़ाते हुए पिछड़ी जातियों की राजनीति करती रही अनुप्रिया पटेल ने पिछड़ा दलित कोटा तय करने का राग अलापा है.

    कांग्रेस के स्टैंड में आया बदलाव

    इधर कांग्रेस ने भी अपने पुराने स्टैंड में बदलाव करते हुए महिला आरक्षण के अन्दर दलित पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए कोटा बनाने का सुक्षाव दिया है, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने साफ शब्दों में कहा है कि दलित पिछड़ी और आदिवासी महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित करने के बाद ही वास्तविक अर्थो में इस बिल का लाभ वंचित तबकों तक पहुंचेगा, ठीक यही मांग जदयू सपा और दूसरे दलों की ओर से आयी है.  

    जदयू का दावा हमसे सीखे भाजपा

    जदयू ने यह दावा कर भाजपा को सकते में ला दिया कि हमने तो वर्षों पहले बिहार विधान सभा  में महिलाओँ को 33 फीसदी का आरक्षण प्रदान कर दिया है, और सिर्फ विधान सभा ही क्यों हमने तो नगर निकाय से लेकर पंचायत कर महिलाओं को आरक्षण प्रदान किया है, और इसके साथ ही दलित पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रबंध भी कर दिया, भाजपा हमारे बताये रास्ते पर चल कर इस विवाद को समाप्त कर सकती है.


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