रांची लोकसभा से राम टहल का छक्का! दिल्ली में सुबोधकांत के साथ बैठक, गेम पलटने की तैयारी में कांग्रेस

    रांची लोकसभा से राम टहल का छक्का! दिल्ली में सुबोधकांत के साथ बैठक, गेम पलटने की तैयारी में कांग्रेस

    Ranchi-लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस रांची सीट पर बड़ा खेल करने की तैयारी में हैं. पूर्व भाजपा सांसद रामटहल चौधरी को कांग्रेस में शामिल होने की खबरों के बीच अब दिल्ली में सुबोधकांत सहाय के साथ बैठक की खबर भी सामने आयी है, जिसके बाद राम टहल चौधरी का रांची के अखाड़े से उतरना निश्चित माना जा जाने लगा है. याद रहे कि राम टहल चौधरी 1991,1996, 1998,1999 और 2014 में रांची लोकसभा से पांच बार कमल खिला चुके हैं और यदि इस बार भी उनकी किस्मत साथ देती है तो यह उनकी छठी जीत होगी.

    रामटहल पर दांव क्यों लगा रही है कांग्रेस

    दरअसल रांची संसदीय सीट पर कांग्रेस चेहरे की किल्लत से जुझ रही है, उसके पास ले देकर सुबोधकांत ही चेहरा हैं, लेकिन वर्ष 2019 में संजय सेठ के आगे करीबन तीन लाख मतों से शिकस्त, वर्ष 2014 में रामटहल चौधरी के आगे करीबन दो लाख मतों शिकस्त खाये सुबोधकांत की जीत को लेकर कांग्रेस संशय़ में हैं. और इसी कोशिश में रामटहल चौधरी पर दांव लगाने की तैयारी की जा रही है. वैसे भी सुबोधकांत सहाय के पास कोई बड़ा सामाजिक आधार नहीं है, जबकि रामटहल चौधऱी के नाम को आगे कर12 फीसदी कुर्मी मतदाताओं को साधा जा सकता है. और खास कर तब जब पूरे झारखंड में कुर्मी मतदातोँ के बीच अर्जुन मुंडा का वह बयान चर्चा में हैं, जिसमें उनके द्वारा साफ शब्दों में कुर्मी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था, दावा किया जाता है कि अर्जुन मुंडा के उस बयान के बाद कुर्मी नेताओं में काफी नाराजगी है, और इसका असर चुनावी परिणाम में देखने को मिल सकता है, इस हालत में कांग्रेस को राम टहल चौधरी के चेहरे में जीत की उम्मीद नजर आती है.

    क्या कहता है रांची का सामाजिक समीकरण

    ध्यान रहे कि रांची लोकसभा में आदिवासी मतदाताओं की संख्या करीबन 28 फीसदी, अल्पसंख्यक 15 फीसदी, कुर्मी 12 फीसदी  के करीब है. यदि 28 फीसदी अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ा जाय तो यह आंकड़ा 43 तक आता है और यदि 12 फीसदी कुर्मी मतदाताओं का साथ मिल जाता है तो यह आंकड़ा 55 तक पहुंच जाता है. कांग्रेस की कोशिश इसी समीकरण के बूते भाजपा को सियासी शिकस्त देने की है.

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