LS 2024- कोडरमा में अन्नपूर्णा की राह कितनी आसान! इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन? जयप्रकाश वर्मा या फिर सामने आयेंगे कोई और..!

    LS 2024- कोडरमा में अन्नपूर्णा की राह कितनी आसान! इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन? जयप्रकाश वर्मा या फिर सामने आयेंगे कोई और..!

    Ranchi-एक तरफ भाजपा झारखंड की कुल 14 में 11 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों का एलान कर इस बात का इंतजार कर रही है कि उसके सामने विपक्ष का चेहरा कौन होगा? जिस इंडिया गठबंधन और झारखंड में महागठबंधन का इतना शोर है, उस महागठबंधन का महाबलि कौन होगा? किसके हाथों में इस बार मोदी रथ को रोकने की कमान सौंपी जायेगी? दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन अभी भी चेहरों के उधेड़बुन में फंसा नजर आता है. हालांकि कई लोकसभा में यह तस्वीर कुछ साफ होती नजर आने लगी है, लेकिन कोडरमा का गणित कुछ ज्यादा ही उलझता नजर आता रहा है. और उसका कारण कि अभी तक इंडिया गठबंधन से यह भी साफ नहीं है कि यह सीट किस घटक दल के खाते में जा रही है, क्योंकि उसके बाद तस्वीर कुछ साफ होने  लगती. और इसी दुविधा में एक तरफ माले से राजकुमार यादव मैदान में उतरने का ताल ठोक रहे हैं, राजद कोटे से सुभाष यादव के समर्थक भी अपनी सक्रियता दिखला रहे हैं. तो झामुमो कोटे से जयप्रकाश वर्मा की नजर भी इस सीट पर बनी हुई है, इस हालत में सवाल खड़ा होता है कि आखिर इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन होगा? और उसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है कि अन्नपूर्णा की राह को मुश्किल बनाने का सबसे मजबूत चेहरा कौन हो सकता है, जो कोडरमा के सामाजिक समीकरण के आधार पर अन्नपूर्णा के राह को रोक सके.

    कोडरमा की सियासत दो सामाजिक समूहों के बीच गोलबंद होती नजर आती है

    ध्यान रहे कि कोडरमा में मुख्य भिड़त दो सामाजिक समूहों के बीच होती रही है. एक तरफ कोयरी कुशवाहा और कुर्मी की सियासत युगलबंदी होती है,वहीं यादव जाति की सियासत होती है, इन दोनों ही जाति समूहों का कोडरमा की सियासत में बड़ा दखल है, फिलहाल कोडरमा संसदीय क्षेत्र में आने वाले कोडरमा विधान सभा से भाजपा की नीरा यादव, बरकठ्टा विधान सभा से निर्दलीय अमित यादव, धनवार विधान सभा से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल, बगोदर से माले के विनोद कुमार सिंह जमुआ सुरक्षित सीट से भाजपा के केदार हाजरा और गांडेय विधान सभा से झामुमो के सरफराज अहमद (इस्तीफा के बाद राज्य सभा) है. यानि विधान सभा के हिसाब से इस समय  यादव जाति के दो विधायक और एक सांसद हैं. इस तस्वीर में कोयरी कुर्मी कहीं नजर नहीं आता, लेकिन हकीकत यह नहीं है, एक दावे के अनुसार इस ससंदीय सीट पर यादव जाति के आसपास ही कोयरी कुशवाहा कुर्मी की आबादी भी है, हालांकि उसका कोई प्रमाणित डाटा उपलब्ध नहीं है. और इसी सामाजिक ताकत के बूते इस संसदीय सीट पर रीतलाल वर्मा और तिलकधारी सिहं की सियासत चलती रही. हालांकि बाबूलाल और रविन्द्र राय की इंट्री के बाद कोयरी कुशवाहा की सियासत पर विराम लगता दिखा.

    क्या है जातीय और सामाजिक समीकरण

    यदि हम सम्पूर्ण सामाजिक समीकरण को समझन की कोशिश करें तो कोडरमा संसदीय सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी करीबन 14 फीसदी, आदिवासी मतदाता करीबन 6 फीसदी, मुस्लिम करीबन 20 फीसदी है. और उसके  बाद करीबन पचास फीसदी की आबादी तमाम पिछड़ी जातियों की है. वहीं एक दूसरे दावे के अनुसार कोडरमा में यादव करीबन तीन लाख, मुस्लिम ढाई लाख की है, कुल मिलाकर यादव मुस्लिम के साथ ही दूसरी पिछड़ी जातियों की भी एक बड़ी आबादी है. यादव जाति उसी चेहरे के साथ खड़ी होगी, जिसकी जीत की प्रबल संभावना है. यानि इस तर्क को स्वीकार किया जाय, तो मनोज यादव की  बात छोड़ भी दें, खुद राजकुमार यादव अन्नपूर्णा की राह को रोकते नहीं दिख रहे, यह ठीक है माले का कोर मतदाता उनके साथ रहेगा, लेकिन राजकुमार यादव को सामने कर यादव जाति में सेंधमारी का प्लान फिलहाल सफल होता नजर नहीं आता.  

    इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन?

    इस हालत में सवाल खड़ा होता है कि आखिर इंडिया गठबंधन किस चेहरे को सामने लाकर अन्नपूर्णा की राह को मुश्किल बनाया जा सकता है, इस हालत में दो नाम सबसे पहले सामने आता है, पहला नाम है कोडरमा से तीन-तीन बार सांसद रहे और भाजपा की सवारी कर झामुमो का दामन थामने वाले जयप्रकाश वर्मा का, दावा किया जाता है कि जयप्रकाश वर्मा को इसी आश्वासन के साथ पूर्व सीएम हेमंत ने झामुमो में इंट्री करवायी थी. जयप्रकाश वर्मा के चेहरे को आगे कर महागठबंधन बीस फीसदी अल्पसंख्यक और कुशवाहा, कुर्मी के साथ ही गैर यादव पिछडी जातियों को अपने साथ खड़ा कर सकती है, दूसरा चेहरा माले से बगोदर विधायक और झारखंड की सियासत का चर्चित चेहरा महेन्द्र सिहं के बेटे विनोद कुमार सिंह का है, विनोद कुमार सिंह अपर कास्ट जातियों में कितनी सेंधामारी करने की स्थिति में होंगे, वह तो एक जूदा सवाल है, लेकिन इतना तय कि तब एक तरफ विनोद सिंह की जमीनी सियासत की हनक होगी तो दूसरी ओर सुविधावादी राजनीति का चेहरा. जिसके लिए विचारधार बस सत्ता की सीढ़ी होती है. इस हालत में देखना होगा कि इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन होगा?  क्योंकि यह तो सियासत है. यहां कई बार पाशे सामने वाले की सुविधा के अनुसार भी फेंका जाता है. शायद गठबंधन के अंदर कुछ यही स्थिति हो.    

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