भाजपा के सियासी ठसक का गहलोत काट! जीत के पहले ही विधान सभा अध्यक्ष की घोषणा कर खड़ा किया सियासी बवाल

    भाजपा के सियासी ठसक का गहलोत काट! जीत के पहले ही विधान सभा अध्यक्ष की घोषणा कर खड़ा किया सियासी बवाल

    TNPDESK-आपने अक्सर भाजपा को अपने अजूबे सियासी चाल से विपक्षी दलों को बचाव की मुद्रा में खड़ा करते देखा होगा, यह भाजपा का राजनीतिक कौशल ही है जो बजरंग दल को बजरंग बलि के समानान्तर खड़ा कर कर्नाटक को फतह करने का सियासी पाशा फेंका था, जो छत्तीसगढ़ में महादेव एप को भगवान महादेव से जोड़ कर भूपेश बघेल शिव के अपमान का आरोप लगाता है, हालांकि यह सारे तीर कभी चलते हैं तो कभी सेल्फ गोल भी कर जाते हैं, क्योंकि बजरंग बलि की इंट्री और पीएम मोदी के धुंआधार प्रचार के बावजूद भाजपा कर्नाटक के अपने किले को बचा नहीं सकी, और करीबन यही स्थिति छत्तीसगढ़ में महादेव एप की होती नजर आ रही है. क्योंकि तमाम चुनावी सर्वेक्षणों में भाजपा काफी पीछे चल रही है.

    तमाम चुनावी सर्वेक्षणों में पीछे चल रहे हैं गहलोत

    लेकिन इस बीच राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा के नक्शेकदम पर चलते हुए ठीक उसी अंदाज में एक सियासी पाशा फेंका है, जो अशोक गहलोत तमाम चुनावी सर्वेक्षणों में पीछे चल रहे हैं, उस अशोक गहलोत ने मतगणना से पहले ही विधान सभा अध्यक्ष के रुप में एक बार फिर से सीपी जोशी की घोषणा कर सियासी भूचाल ला दिया हैं, दावा किया जा रहा है कि सियासत के जादूगर माने जाने अशोक गहलोत ने इस सियासी चाल से मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि चुनावी सर्वेक्षण चाहे जो कह रहे हों, लेकिन सरकार तो उनकी ही बनने जा रही है.

    ध्यान रहे कि कांग्रेस आलाकमान पहले ही गहलोत के कई सहयोगियों का पर कतर चुका है, दावा किया जाता है कि मतदाताओं के बीच अशोक गहलोत को लेकर कोई नाराजगी नहीं है, उनकी मुख्य शिकायत  विधायकों की कार्यशैली को लेकर है. और यही कारण है कि केन्द्रीय आलाकमान विधायकों की टिकट काट कर इस नाराजगी को दूर करने की कोशिश कर रहा है. अब तक महेश जोशी से लेकर शांति धारीवाल जैसे उन विधायकों का टिकट काटा गया है, जो अशोक गहलोत के काफी करीबी बताये जाते थें.

    केन्द्रीय आलाकमान को आंख दिखलाने की कोशिश तो नहीं

    हालांकि अशोक गहलोत की इस घोषणा के बाद यह सवाल भी खड़ा होने लगा है कि क्या अशोक गहलोत केन्द्रीय आलाकमान को आंख दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि अब तक उनके कम से कम सौ समर्थकों को टिकट दिया जा चुका है, साफ है कि यदि कांग्रेस को बहुमत मिलती है तो ये सारे विधायक अशोक गहलोत के साथ ही खड़े नजर आयेंगे, तब क्या उस स्थिति में अशोक गहलोत खुद को सीएम बनाने का दवाब बनायेंगे. क्योंकि विधान सभा अध्यक्ष से लेकर सीएम की घोषणा तो केन्द्रीय कमेटी करती है, फिर इस हालत में अशोक गहलोत के द्वारा अभी से ही विधान सभा अध्यक्ष के लिए सीपी जोशी की घोषणा का सियासी संदेश क्या है.

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