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Big breaking-लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लेने पर तत्काल रोक

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 4:49:08 AM

TNPDESK-लोकसभा चुनाव के ठीक पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने मोदी सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए तत्काल प्रभाव से इलेक्टोरल बॉन्ड के रुप में कॉरपोरेट कंपनियों से प्राप्त किये जा रहे चंदे पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने बॉन्ड की गोपनीयता को भी असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि केन्द्र सरकार की यह योजना सूचना के अधिकार अधिनियिम का खुला उल्लंघन है, इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राजनीतिक पार्टियों से छह मार्च तक अपना हिसाब देने को कहा है. पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मत राय से यह फैसला सुनाते हुए कहा कि  'पॉलिटिकल प्रॉसेस में राजनीतिक दल अहम यूनिट होते हैं, पॉलिटिकल फंडिंग की जानकारी, वह प्रक्रिया है, जिससे मतदाता को वोट डालने के लिए सही चॉइस मिलती है. वोटर्स को चुनावी फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे मतदान के लिए सही चयन होता है।'

तीन नवंबर को पूरी हुई थी सुनवाई

यहां ध्यान रहे कि इस मामले की सुनवाई तीन नवंबर 2023 को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की अदालत में हुई थी, कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, आज उसी मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों से 30 सितंबर तक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदे की राशि का पूरा हिसाब देने को कहा है.

मुख्य न्यायाधीश का सवाल- आखिर इस इलेक्टोरल बॉन्ड की जरुरत क्या

मुख्य न्यायाधीश ने चंद्र चूड़ ने सरकार के सवाल किया कि आखिर इस इलेक्टोरल बॉन्ड की जरुरत क्या है. जबकि सरकार को इस बात की पूरी जानकारी रहती है कि किस राजनीतिक पार्टी को कितना चंदा जा रहा है, और इसका स्त्रोत क्या है. जब दूसरे राजनीतिक दलों को यह पत्ता नहीं होता कि दूसरे राजनीतिक दलों की आय का स्त्रोत क्या है. यहां ध्यान रहे कि मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार यह जानना  नहीं चाहती की किसने किसको कितना पैसा दिया, चंदा देने वाला ही अपनी पहचान छुपाकर रखना चाहता है. ताकि दूसरी पार्टियों को इसकी जानकारी नहीं हो. यहां याद रहे कि इस इलेक्टोरल बॉन्ड को समाप्त करने की मांग एक साथ कई याचिका दायर कर की गयी थी. इन याचिकाकर्ताओं में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), कांग्रेस नेता जया ठाकुर और सीपीएम शामिल थी. जिसकी पैरवी प्रख्यात वकील कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और विजय हंसारिया की द्वारा की गयी थी.

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