किसी भी एकादशी के दिन क्यों नहीं खाना चाहिए चावल, जान लीजिए इससे संबंधित पौराणिक वजह


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):साल में कुल 24 एकादशियां पड़ती है. जहां 1 महीने में पहला शुक्ल पक्ष की एकादशी से दूसरा कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत लोग रखते है.एकादशी में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की आराधना की जाती है. वही आप लोगों ने अक्सर अपने बड़ों से सुना होगा कि इस दिन चावल नहीं खाया जाता है.लोग इसका पालन भी करते है लेकिन बहुत से लोगों को इसके पीछे की सही वजह पता नहीं है. अगर आपको भी इसके पीछे की सही वजह नहीं पता तो आज हम आपको बताने वाले है कि आखिर क्यों एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही होती है.
जान लीजिए इससे संबंधित सारा नियम
एकादशी के दिन चावल खाने से मांस खाने जैसा दोष लगता है.ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर क्यों इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए तो आपको बता दें कि पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि मेधा ने देवी शक्ति के प्रकोप से बचने के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था और धरती पर जाकर चावल और गेहूँ के रूप में वास करने लगे.जिस दिन यह रूप धारण किया उस दिन एकादशी का दिन कहा जाता था.यही वजह है कि इस दिन चावल खाने की मनाही होती है.वरना लोगों को इसका दोष लगता है.यदि इस दिन कोई भी चावल खाता है तो महर्षि मेधा के अंग को खाने के समान माना जाता है इसलिए इस दिन कोई भी चावल खाता है तो घोर पाप माना जाता है.
चावल खाने से चढ़ता है पाप
जो लोग एकादशी का व्रत रखते है वह फलाहार करते है यानि फल खाकर ही दिन भर रहते है और भगवान विष्णु की आराधना करते है भगवान विष्णु विश्व के पालन हार माने जाते है.वही जो लोग इस व्रत को नहीं करते है और चावल खाते है तो उनके द्वार किये गए पूर्व के सभी पुण्य नष्ट हो जाते है और वे पाप के भागी बनते है.इसलिए इस दिन भूल कर भी चावल खाना नहीं चाहिए.
व्रत नारा रखने वाले लोगों को भी खाना नहीं चाहिए चावल
एकादशी के दिन भले ही जो व्रत करते है वह फलाहार कर लेकिन जो लोग व्रत नहीं भी रखते है वहां भी चावल नहीं खाते है. बहुत से लोग ऐसे है जिनके पुरे परिवार में ही इस दिन चावल नहीं बनाया जाता है.उस दिन रोटी या कुछ अन्य चीजें खा कर लोग रह जाते है.
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