विपक्ष का प्रहार, देश के साथ अब अडाणी को भी अच्छे दिन का इंतजार, इस पाप का गुनाहगार सिर्फ अडाणी नहीं

    विपक्ष का प्रहार, देश के साथ अब अडाणी को भी अच्छे दिन का इंतजार, इस पाप का गुनाहगार सिर्फ अडाणी नहीं

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कभी दुनिया के शीर्ष अमीरों में गिनती होने वाले गौतम अडाणी को भी अब अच्छे दिन का इंतजार है, अडाणी समूह के लिए कहीं से कोई अच्छा संकेत नहीं मिल पा रहा है, उनकी संपत्ति में हर दिन गिरवाट आ रही है, फिलहाल स्थिति यह है कि वह दुनिया में अमीरों की सूची से टॉप 20 से भी बाहर हो चुके हैं. हिंडनवर्ग की रिपोर्ट आने के बाद शेयर जमीन पर गिर पड़े हैं. एक ही दिन में करीबन 12.5 अरब डॉलर का बड़ा झटका लगा है.

    मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को मिला हथियार 

    इस बीच विपक्ष इस मुद्दे की आड़ को मोदी सरकार को घेरने में लगी गयी है, कांग्रेस सहित 13 विपक्षी दलों के द्वारा इस मुद्दे पर जीपीएसी की जांच पर अड़ी है, विपक्ष की मांग इस पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी या जीपीएसी जांच की है. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इतने बड़ी घटना सिर्फ किसी व्यवसायिक घराने के द्वारा नहीं की जा सकती, इसमें सरकार की भूमिका है, सत्ता के इशारे पर अडाणी समूह में एलआईसी और एसबीआई का निवेश किया गया. जिसके कारण आज इन कंपनियों के शेयर भी गिर रहे हैं. 

    अडाणी समूह में एलआईसी और एसबीआई की कूल पूंजी का मात्र एक फीसदी हिस्सा

    जबकि सरकार का मानना है कि अडाणी समूह में एलआईसी और एसबीआई की कुल पूंजी का मात्र एक फीसदी हिस्सा लगा है, इन कंपनियों के लिए यह कोई बड़ी आपदा नहीं है. इस बीच अडानी एंटरप्राइजेस के शेयर को एनएसई ने एक दिन पहले ही एडीशनल सर्विलांस मीजर (ASM) फ्रेमवर्क में डाल दिया था. इससे शेयर पर दबाव और बढ़ गया है. साथ ही आरबीआई ने सभी बैंको से इस बात की जानकारी की मांग की है कि अडाणी समूह में उनका कितना पैसा लगा है.

    अडानी प्रकरण पर वित्त मंत्री का जवाब

    यहां बता दें कि अडाणी प्रकरण के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय मार्केट से 2 बिलियन डॉलर की राशि बाहर निकाल लिया है. जब यही सवाल वित्त मंत्री सीतारमण से किया गया तो उनका जवाब था कि अब उनके बारे में इसका अध्ययन नहीं किया गया है, एक बार पूरे मामले की जानकारी प्राप्त करने के बाद ही वह कुछ बोलने की स्थिति में होगी. वित्त मंत्री इस मुद्दे पर विपक्ष के द्वारा जीपीएसी जांच पर भी कुछ बोलने से इंकार कर दिया, उनका कहना था कि इस मामले को देखने के लिए देश में रेग्युलेटर्स हैं. LIC-SBI के बहुत कम स्टेक अडानी की कंपनियों में लगे हैं.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 


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