झारखंड के कोल्हान की सोने की खदान क्यों केंद्र और राज्य सरकार में कड़वाहट बढ़ा सकती है,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    झारखंड के कोल्हान की सोने की खदान क्यों केंद्र और राज्य सरकार में कड़वाहट बढ़ा सकती है,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): जमशेदपुर  सिर्फ राजनीति और चुनाव को लेकर ही सुर्खियां नहीं बटोर रहा है, बल्कि सोने की खदान को लेकर भी इसकी रांची से लेकर दिल्ली तक चर्चा है . पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में सोने की खदान है. घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के गुडाबांधा ब्लॉक में सोने की खदान है. यहां सिर्फ सोने की खदान ही नहीं है बल्कि पन्ना पत्थर की भी खदान है. पन्ना पत्थर की तस्करी की लगातार सूचनाएं मिलती रहती हैं. केंद्रीय खान मंत्रालय ने झारखंड सरकार को सोने की एक खदान सहित 10 खनिज ब्लॉक की नीलामी करने को कहा है. साथ ही मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ऐसा करने में विफल रही तो केंद्र इन ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगा.

    सूत्र बताते हैं कि 10 ब्लॉक में एक तांबे की खदान, एक चूना पत्थर की खदान भी शामिल है.  2021 में खनन नियमों में संशोधन किया गया था. उसके अनुसार यदि राज्य सरकार पारस्परिक रूप से सहमत अवधि के भीतर खदानों की नीलामी करने में विफल रहती है ,तो केंद्र के पास खनिज ब्लॉक की नीलामी करने का अधिकार होगा. कहा तो यह भी जाता है कि जब खनिज ब्लॉकों की नीलामी की बात आती है तो झारखंड सरकार अन्य राज्यों से पिछड़ जाता है.भारतीय वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा झारखंड सरकार को सौंपी गई 38 रिपोर्ट में से अब तक केवल पांच का उपयोग ही नीलामी के लिए किया गया है.

     नीलामी प्रक्रिया से संबंधित सभी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश 

    इधर, राज्य सरकार ने भी दिसंबर 2024 तक 15 ब्लॉक को नीलामी के लिए अधिसूचित करने का आश्वासन दिया है . यह भी जानकारी निकल कर आ रही है कि झारखंड सरकार ने भी खनन विभाग से जुड़े अधिकारियों को सभी तरह के मेजर तथा माइनर खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया से संबंधित सभी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है. वैसे कोल ब्लॉक जिनका फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं हो सका है, वैसे कोल ब्लॉकों के फॉरेस्ट   क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई है.

    सोने की खदान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार में ठन सकती है

    झारखंड के कोयलांचल में कोयले की खदानें हैं तो कोल्हान में सोने तक की खदानें हैं. कीमती पत्थरों की खदान है. लेकिन व्यवस्था इतनी लचर है कि सही ढंग से इसका उपयोग नहीं किया जाता. सोने की खदान को लेकर ऐसा लगता है कि केंद्र और राज्य सरकार में ठन सकती है. केंद्र सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर तय समय के अनुसार सोने की खदान सहित 10 खनिज ब्लॉक की नीलामी नहीं की गई तो केंद्र सरकार इसकी नीलामी करेगा. कोयलांचल में कोयले की चोरी   होती आ रही है. यह अलग बात है कि अभी कोयला उत्पादक कंपनियों में कोयले का प्रोडक्शन आउटसोर्सिंग कंपनियां के जरिए हो रहा है. आउटसोर्स कंपनियां भी कोयला चोरी रोकने में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाती. यह अलग बात है कि कंपनियों का प्रोडक्शन टारगेट तो पूरा हो जा रहा है लेकिन कोयला बहुल इलाकों का भविष्य क्या होगा, इसको लेकर कोई चिंता नहीं करता.

    सोने की खदान की नीलामी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार क्या रुख अख्तियार करेगी

    धनबाद जिला टास्क फोर्स की टीम जब भी सड़क पर उतरती है, तो अवैध खनिज संपदा से लदे वाहन  पकड़ में आए है. मतलब साफ है कि यह धंधा कभी मंदा होता नहीं है. अब देखना है कि कोल्हान के सोने की भंडार वाली खदान की नीलामी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार क्या रुख अख्तियार करती है. वैसे भी झारखंड में गठबंधन की सरकार चल रही है. केंद्र के साथ उसके रिश्ते अच्छे नहीं हैं.

    31 जनवरी 2024 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा. जेल से 5 महीने  बाद बाहर आए.जेल से छूटने के बाद वह फिर से मुख्यमंत्री बन गए हैं. इस बीच झारखंड में चुनाव का भी बिगुल बजने वाला है. झारखंड सरकार भी चुनावी मोड में दिख रही है .सभी पार्टियां चुनाव को लेकर तैयारी कर रही हैं. इस बीच झारखंड सरकार को सोने की एक खदान सहित 10 खनिज ब्लॉक को नीलामी करने का केंद्र ने निर्देश दिया है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार ऐसा नहीं करती है तो केंद्र इन खदानों की नीलामी करेगा. देखना होगा आगे आगे होता है क्या

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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