गोड्डा में भी लगातार लोग हो रहे "जामताड़ा" मॉडुल के शिकार, सामने आये दो मामले


गोड्डा(GODDA): यूं तो जामताड़ा मॉडुल के ऑनलाइन फ्रॉड देश के सभी राज्यों में मशहूर हैं. जामताड़ा में बैठे-बैठे देश के किसी भी कोने के लोगों के पैसे उनके अकाउंट से ऐसे निकाल लेते हैं. मानो उनका खुद का ही अकाउंट हो और जब चाहें तब निकाल लिया. अब गोड्डा में लोग भी इससे अछूते नहीं हैं. आये दिन लोग किसी न किसी तरीके के ऑनलाइन ठगी के शिकार बन रहे हैं. कभी बिजली कनेक्शन काटे जाने के नाम पर, कभी लाटरी निकलने के नाम पर, कभी ऑनलाइन शॉपिंग तो कभी कुछ और. इसी कड़ी में रविवार को नगर थाना में दो मामले ऑनलाइन फ्रॉड के नाम पर हुए. इनमें से एक के खाते से 56 हजार तो दुसरे के खाते से 20 हजार रुपए निकाल लिए गए.
ऑनलाइन मार्केटिंग के नाम पर 56 हजार की ठगी
शहर के सरकंडा मोहल्ले के अरुण कुमार ने तीन-चार दिन पहले ऑनलाइन कुर्सियों का आर्डर दिया था. मगर तीन दिन बीत जाने के बाद भी जब उस कंपनी से कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने वेबसाइट पर दिए गए टोल फ्री नम्बर पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई, जिसपर अरुण को कहा गया कि आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है. अपने सामान की जल्द डेलीवेरी के लिए आप अपना आधार और पैन नंबर लिखा दें. बस फिर क्या था जैसे ही उन्होंने दोनों नंबर मुहैय्या करवाया, उनके खाते से तीन किस्तों में 56 हजार निकल गये.
आर्मी मैन बनकर की बीस हजार रूपय की निकासी
दुसरे मामले में पथरगामा के पारसपानी के युवा बांस व्यापारी गौरव को फौजी बनकर एक कॉल आया और गोड्डा में 200 पीस बांस का आर्डर दिया गया. गूगल से लोकेशन भी दिया जहां डिलीवरी देनी थी. रविवार को जब गौरव और उसके भाई बांस लेकर बताये गए पते पर पहुंचे तो वहां कहा गया कि उन्होंने कोई आर्डर नहीं दिया है. फिर उस नंबर पर कॉल किया तो उन्होंने ऑनलाइन पेमेंट की बात कहकर गौरव के नंबर पर एक रूपये का पेमेंट भेजा, साथ ही एक चेक का स्कैनर कोड भी भेजा, जिसपर इंडियन आर्मी का मोनोग्राम था. गौरव को कहा गया कि कोड को स्कैन कर 20 हजार भेज दीजिये और यहीं गौरव गलती कर बैठा. इंडियन आर्मी के नाम पर भरोसा हो गया और उसने पैसे भेज दिए.
गोड्डा में नहीं है साइबर थाना, पुलिसकर्मी और लोग दोनों परेशान
साइबर ठगी के इतने सारे मामले जिले में हो रहे हैं, मगर परेशानी की बात यह कि यहां कोई साइबर थाना मौजूद नही है, जिसकी वजह से थानों में पहुंची शिकायतों का कोई समाधान नहीं निकल पाता और ना ही पीड़ित लोगों को सही जानकारी ही थानों से मिल पाती है. थाना वाले भी शिकायत लेकर पहुंचे लोगों को दुमका या देवघर साइबर थाना जाने की सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ने को विवश हो जाते हैं.
रिपोर्ट: अजीत सिंह, गोड्डा
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