धनबाद का टुंडी जंगल हाथियों के प्रजनन के लिए बन गया है सुरक्षित स्थान,जानिए क्या है इसका कारण

    धनबाद का टुंडी जंगल हाथियों के प्रजनन के लिए बन गया है सुरक्षित स्थान,जानिए क्या है इसका कारण

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद जिले का टुंडी इलाका हाथियों के प्रजनन का सुरक्षित जगह बन गया है. मादा हाथियों के प्रजनन के लिए ऋषि भीठा पहाड़ी इलाका कई मायनों में हाथियों के लिए सुविधा की जगह हो गया है. यही वजह है कि प्रजनन के लिए मादा हाथी इस जगह को चुनती है. वन विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो पिछले 7 से 8 महीने में मादा हाथियों ने तीन बच्चों को जन्म दिया है. वन एवं पर्यावरण विभाग ने हाल ही में मुख्यालय को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी है.

    टुंडी में हाथियों की झुंड में संख्या अब 28 

    रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में अलग-अलग समय में हाथियों का झुंड ऋषिभीठा पहुंचा और मादा हाथियों ने बच्चों को जन्म दिया. टुंडी में हाथियों की झुंड में संख्या अब 28 हो गई है. इससे पहले टुंडी पहुंचने वाले झुंड में 22 से 25 हाथी हुआ करते थे. लेकिन अब 28 हो गए हैं. हाथियों के झुंड को टुंडी पहाड़ों में ज्यादा समय रहने के लिए वहां की व्यवस्था उन्हें खींचती है. ऋषि भीठा में चेक डैम का निर्माण किया गया है. आसपास इलाकों में उनके भोजन की भी अच्छी खासी व्यवस्था है. हाथियों के पसंदीदा केला, नारियल, बांस के जंगल लगाए गए हैं. चेकडैम भी बनाया गया है. इसलिए उस इलाके में हाथियों को भोजन और जल की कोई समस्या नहीं होती.

    टुंडी का जंगल हाथियों के लिए सुरक्षित 

    यह जंगल लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इस वजह से भी हाथी अपने सुविधा के अनुसार घूमते फिरते हैं. पहाड़ों पर भोजन नहीं मिलने के कारण ही हाथी गांव की ओर रुख करते हैं. यह अलग बात है की टुंडी के इलाके में हाथियों का उत्पात जारी रहता है. महुआ पकने के समय में इनका उत्पात अधिक बढ़ जाता है. महुआ की सुगंध इन्हें पहाड़ों से खींचकर गांव की ओर ले जाती है. टुंडी के ग्रामीण इलाकों में महुआ से शराब बनाने का काम भी होता है. घर-घर में शराब बनाई जाती है .हाथी का झुंड जब गांव में महुआ खा लेते हैं ,उसके बाद अधिक मदमस्त हो जाते हैं. फिर फसलों को रौदना शुरू कर देते हैं. जो भी हो लेकिन टुंडी का यह जंगल हाथियों के लिए अभी सुरक्षित स्थान बना हुआ है.

    प्रजनन के लिए भी सुरक्षित स्थान होने के कारण हाथियों का झुंड इस जगह पर रहना पसंद करता है. हालांकि यह व्यवस्था इसलिए की गई है कि हाथियों का झुंड गांव की ओर रुख नहीं करें और ग्रामीणों का कोई नुकसान नहीं हो. लेकिन गाहे बेगाहे हाथियों का झुंड ग्रामीण इलाकों में प्रवेश कर ही जाता है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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