दुमका में गहराता जा रहा है कोल ब्लॉक का मामला, विरोध में ग्रामीण हुए एकजुट, पढ़ें क्या है ग्रामीणों की मांग

    दुमका में गहराता जा रहा है कोल ब्लॉक का मामला, विरोध में ग्रामीण हुए एकजुट, पढ़ें क्या है ग्रामीणों की मांग

    दुमका(DUMKA):रत्नगर्भा झारखंड की धरती खनिज संपदा से भरपूर है. उपराजधानी दुमका की धरती के नीचे कोयला का अकूत भंडार है, लेकिन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ग्रामीण इस कदर एकजुट हो जाते हैं कि खनिज संपदा का वैध तरीके से खनन करना संबंधित एजेंसी के लिए परेशानी बन जाता है. दुमका जिला के शिकारीपाड़ा में कोल ब्लॉक आवंटित हुआ है, संबंधित एजेंसी जब जब कोल ब्लॉक खोलने की दिशा में काम शुरू करने के लिए कदम बढ़ाती है, लोगों का विरोध शुरू हो जाता है. जिसके बाद एजेंसी को अपना कदम पीछे खींचना पड़ता है.

     परंपरागत हथियार तीर - धनुष, कचिया हंसुआ, तलवार से लैस विरोध में ग्रामीण हुए एकजुट

    आपको बताये कि कोल ब्लॉक के विरोध में शिकारीपाड़ा प्रखंड के पकलूपाड़ा हटिया परिसर में दर्जनों गांव के ग्रामीण एकजुट हुए. स्त्री पुरुष सभी परंपरागत हथियार तीर - धनुष, कचिया हंसुआ, तलवार से लैस थे. ग्रामीणों के समर्थन में पंचायत प्रतिनिधि के तौर पर जिला परिषद सदस्य प्रकाश हांसदा भी उपस्थित थे. ग्रामीण एक सुर से यही कहते नजर आए कि जल, जंगल, जमीन हमारा है. किसी भी स्थिति में यहां कोलियरी खुलने नहीं देंगे.उनका कहना था कि कोल कंपनियां कुछ लोगों को नौकरी दे देती है, लेकिन बाकी सभी लोग बेरोजगार हो जाते हैं. कोलयरी चालू होने से हम कहीं के नहीं रहेंगे. इसे खोलने की दिशा में जो भी प्रयास हो रहे हैं उसका हम पुरजोर विरोध करते हैं. इसके लिए कोई भी लड़ाई लड़नी पड़े हम तैयार हैं. जो लोग बिचौलिए की भूमिका में है, हम लोग उसको भी चिन्हित कर उसका विरोध करेंगे.

     ग्रामीणों का कहना है कि कोल डंपिंग यार्ड भी शुरू नहीं होने देंगे

    ग्रामीण कोल ब्लॉक के साथ - साथ कोल डंपिंग यार्ड का भी विरोध कर रहे थे.बता दें कि पाकुड़ जिला के अमड़ापाड़ा क्षेत्र से जो कोयला निकलता है, उसके लिए पकदाहा हरिनसिंगा रेलवे स्टेशन पर बीजीआर कंपनी द्वारा कोल डंपिंग यार्ड तैयार किया जा रहा है. यहां से गुड्स ट्रैन द्वारा कोयला लोड होकर देश के अलग अलग हिस्सों में भेजा जाएगा. फिलहाल यहां डंपिंग यार्ड निर्माणाधीन है. ग्रामीणों का कहना है कि कोल डंपिंग यार्ड भी शुरू नहीं होने देंगे. ग्रामीणों का साथ देने आए जिला परिषद सदस्य प्रकाश हांसदा ने कहा कि इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं. इसी वजह से ग्रामीणों की आवाज बनने आए हैं. उन्होंने कहा कि यहां संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम लागू है. इसमें जमीन अहस्तांतरणीय है तो फिर कैसे कोल ब्लॉक खुलेगा.

    एसपीटी एक्ट के कुछ ऐसे प्रावधान है जिससे उद्योग लगाने में कठिनाई होती है

    वहीं एसपीटी एक्ट के कुछ ऐसे प्रावधान है जिस वजह से कोई भी उद्योग लगाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसके बाबजूद इसी संथाल परगना प्रमंडल में अडानी पावर प्लांट सहित कई उद्योग लगे है, क्योंकि हर समस्या का समाधान होता है. जरूरत है ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की. विस्थापन और पुनर्वास नीति इस रूप में प्रभावी हों ताकि जमीन देकर लोगों को पछताना ना पड़े, क्योंकि इसी दुमका के कुछ लोग मसानजोर डैम निर्माण के लिए जमीन देकर आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे हैं. ग्रामीणों को समझाने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका काफी अहम होगी.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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