झारखंड को टाटा ने बहुत कुछ दिया,कैंसर अस्पताल से लेकर स्टील और कारखाना लगा कर बदल दी तस्वीर

    झारखंड को टाटा ने बहुत कुछ दिया,कैंसर अस्पताल से लेकर स्टील और कारखाना लगा कर बदल दी तस्वीर

    रांची(RANCHI): टाटा ग्रुप के मालिक और उद्योग जगत में झारखंड को पहचान देने वाले रतन टाटा दुनिया को अलविदा कह चुके है. लेकिन उनकी याद और उनके द्वारा सजाया गया शहर सदियों उन्हे याद करता रहेगा. टाटा ने सिर्फ कारोबार नहीं किया बल्कि अपनी जिंदादिली भी दिखाई है.गरीब लोगों को इलाज में कोई दिक्कत ना हो इस लिए रांची में टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल की स्थापन की. रतन टाटा एक ऐसी व्यक्ति थे जो इतने बड़े मुकाम पर होने के बाद भी निचले पैदान पर खड़े व्यक्ति के बारे में सोचते थे. तभी को एक सपना देख कर माध्यम वर्गीय लोगों के लिए नैनो कार बना दिया.

    रतन टाटा का झारखंड से बेहद गहरा लगाव रहा है. इनके पूर्वज जमशेद जी टाटा ने 1912 में जमशेदपुर शहर में एशिया की पहली स्टील प्लांट की आधारशिला रखी थी. इससे पहले टाटा शहर में कुछ नहीं था. जंगल और कुछ गाँव ही थे. लेकिन जब प्लांट की आधारशिला रखी तो देखते ही देखते पूरे इलाके की तस्वीर बदल गई. इसके बाद भी उनका कारवां रुका नहीं बल्कि कई प्लांट को झारखंड में लगाया गया. इनके बाद जब टाटा ग्रुप की कमान रतन टाटा को मिली तो इसे और भी उचाइयों पर लेकर गए.

    टाटा शहर में ट्रक से लेकर कई एसयूवी कार का प्लांट शुरू कर दिया. जिससे इलाके का विकास और भी तेजी से होता चला गया. लोगों के सामने रोजगार के साधन खुलने लगे.इतना ही नहीं टाटा ने पूरे शहर में csr(corporate Social Responsiblity) के तहत कई अस्पताल,पार्क भवन को बनवाया जिससे जमशेदपुर की तुलना मिनी मुंबई से होनी शुरू हो गई. जमशेदपुर शहर ऐसा शहर बन गया जिसे लोग अब भी मुंबई के नाम से जानते है.

    इसके अलावा अगर टाटा ग्रुप के अस्पताल पर नजर डाले तो जमशेदपुर में टाटा मेमोरियल अस्पताल चल रहा था जिसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज भी कम से कम पैसे में किया जाता रहा. लेकिन मरीज को कोई दिक्कत ना हो इसे देखते हुए दूसरा अस्पताल रांची के कांके में खोल दिया गया. अब इस अस्पताल में भी हर दिन मरीज पहुँच कर अपना इलाज करा रहे है. इससे साफ है कि टाटा ग्रुप का लगाव झारखंड से कितना रहा है.

    हर साल टाटा आते थे झारखंड

    हर साल जमशेद जी की जयंती पर रतन टाटा झारखंड आते थे. वह यहाँ कई कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे. दो से तीन दिनों तक पूरे शहर को इस दौरान दुल्हन के जैसा सजा दिया जाता था. हर जगह से इस दिन घूमने लोग जमशेदपुर पहुंचते थे.                                    


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