लोबिन हेंब्रम और जेपी पटेल के भाग्य का फैसला तय करेगा स्पीकर ट्रिब्यूनल, शिबू सोरेन और अमर बाउरी का क्या है आरोप, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    लोबिन हेंब्रम और जेपी पटेल के भाग्य का फैसला तय करेगा स्पीकर ट्रिब्यूनल, शिबू सोरेन और अमर बाउरी का क्या है आरोप, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    TNP DESK: लोबिन हेंब्रम झामुमो के विधायक रहेंगे अथवा नहीं , जे पी पटेल भाजपा के विधायक रहेंगे अथवा नहीं, इसका फैसला लगता है कि बहुत जल्द हो जाएगा. स्पीकर ट्रिब्यूनल जल्द ही इसका फैसला दे सकता है. बुधवार को ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई तो पहले ही शुरू हो गई थी. दोनों पक्षों ने बुधवार को अपनी अपनी बात कही. सूचना के मुताबिक स्पीकर ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. किसी भी दिन मामले पर फैसला आने की उम्मीद है.

    लोबिन ने पार्टी के विरोध में राजमहल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा इसलिए की गई कार्रवाई 

    बुधवार को सुनवाई के दौरान वादी शिबू सोरेन की ओर से कहा गया कि लोबिन हेंब्रम ने पार्टी के विरोध में राजमहल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा है. इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. उनकी सदस्यता खत्म करने की बात कही गई. इस पर हेंब्रम का जवाब था कि 1995 में भी उन्होंने चुनाव लड़ा था. तब पार्टी ने उन्हें नहीं निकला था. यहां तक की पार्टी से निष्कासन संबंधित कोई नोटिस भी नहीं मिला है. सदन में भी मैंने हेमंत सोरेन के पक्ष में वोट किया है. इससे यह साबित होता है कि पार्टी मान रही है कि मैं झारखंड मुक्ति मोर्चा का विधायक हूं. इसलिए वादी की ओर से कही गई बातों का कोई मतलब नहीं है.

    जे पी पटेल के मामले में अमर कुमार बाउरी ने कहा कि पटेल सिर्फ इतना बता दे कि वह कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर हजारीबाग सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा है या नहीं. पटेल का जवाब था कि उनका मामला दल बदल का मामला नहीं बनता है. एक दिन पहले ही याचिका की कॉपी मिली है .जवाब देने के लिए 90 दोनों का समय चाहिए. स्पीकर ने इसे नहीं माना और शॉर्ट पीरियड में जवाब देने को निर्देश दिया.

    चमरा लिंडा और लोबिन  दो विधायकों के खिलाफ कार्रवाई 

    बता दे कि झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने दो विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की है. राजमहल से चुनाव लड़ने के कारण पार्टी से हेंब्रम को निष्कासित कर दिया गया है. जबकि इसी आरोप में विधायक चमरा लिंडा को सिर्फ सस्पेंड किया गया है .कारवाई होने के बाद झामुमो की किरकिरी भी हुई थी. कहा गया था कि एक आंख में काजल और एक आंख में सुरमा की कार्रवाई सही नहीं है. वैसे, झारखंड मुक्ति मोर्चा में रहते हुए लोबिन हेंब्रम सरकार के खिलाफ हमलावर रहे थे. कई तरह की चर्चाएं चल रही थी. चर्चा यह भी थी कि वह दूसरे किसी दल से राजमहल लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. लेकिन बात नहीं बनी तो फिर उन्होंने निर्दलीय राजमहल लोकसभा से चुनाव लड़ा. यह अलग बात है कि वह हार गए . चमरा लिंडा भी लोकसभा का निर्दलीय चुनाव लड़े. उन्हें भी पराजय का सामना करना पड़ा. लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें सिर्फ पार्टी से निलंबित किया.

    स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला ही तय करेगा की हेंब्रम झामुमो के विधायक रहेंगे अथवा नहीं

    इधर, मांडू से भाजपा के विधायक जे पी पटेल भाजपा से कूद कर कांग्रेस में गए और हजारीबाग से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा. लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा. अब स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला ही तय करेगा की हेंब्रम झामुमो के विधायक रहेंगे अथवा नहीं. जे पी पटेल भाजपा के विधायक रहेंगे अथवा नहीं. जे पी पटेल झारखंड मुक्ति मोर्चा के टुंडी से विधायक मथुरा प्रसाद महतो के नजदीकी रिश्तेदार हैं. मथुरा प्रसाद महतो ने भी गिरिडीह लोकसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. लेकिन उन्हें भी हार का मुंह देखना पड़ा. वैसे झारखंड में विधानसभा का चुनाव बहुत नजदीक है. प्रदेश में चुनाव की रणभेरी बच चुकी है .सभी दल अपने-अपने ढंग से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. इस बीच स्पीकर ट्रिब्यूनल का फैसला क्या आता है, इसकी ओर सब की नज़रें टिकी हुई है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 

     


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