खेतों को बंजर कर रहे खदान से निकलने वाली मिट्टी और पत्थर , मुखिया ने लगाया आरोप


चाईबासा(CHAIBASA): किसानों के जीवन का सबसे मुख्य आधार उनकी खेती होती है. खेती के लिए सबसे जरूरी खेत होता है. उर्वर मिट्टी के कारण खेती भी अच्छी होती है. लेकिन जब ये खेत बंजर हो जाए तो किसानों के लिए इससे बुरा क्या ही होगा. मगर, सारंडा इलाके के कई गांवों के किसानों को अभी इसी से गुजरना पड़ रहा है.
दरअसल, मामला यह है कि सेल की गुवा खदान की ओवर वार्डेन मिट्टी और पत्थर रानी चुआं क्षेत्र के जंगलों से बहकर सारंडा जंगल और प्राकृतिक नदी-नालों को प्रभावित कर रहा है. इससे सारंडा के छोटानागरा और गंगदा पंचायत के दर्जनों गांवों के ग्रामीण आक्रोशित हैं. 19 जुलाई को विभिन्न गांवों के दर्जनों ग्रामीण गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल के नेतृत्व में सारंडा जंगल की रानी चुआं पहाड़ियों को चढ़कर सेल की गुआ खादान तक पहुंचे.
नदी-नाला और जंगल हो रहे प्रदूषित
राजू सांडिल ने कहा कि गुवा खादान प्रबंधन ने जहां ओवर वार्डेन की मिट्टी, पत्थर डम्प किया है. उसी डम्प क्षेत्र से वर्षा की पानी के साथ वह मिट्टी बहकर जोजोगुटु, राजाबेडा़, बाईहातु, जामकुंडिया, छोटानागरा से लेकर दोदारी, दुईया आदि गांव के नदी-नाला किनारे स्थित किसानों की कृषि भूमि को न सिर्फ बंजर कर रही है, बल्कि जंगल और नदी-नाला को भी प्रदूषित और भारी नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने कहा कि गुवा खादान प्रबंधन से मिलकर दर्जनों बार इस समस्या का समाधान, पक्का चेकडैम बनाने की मांग, बंजर हुई खेतों का मुआवजा और खेतों के उपर से लौह चूर्ण हटाने की मांग के अलावे प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को खादान में नौकरी देने आदि की मांग की जाती रही है. लेकिन, गुवा प्रबंधन के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है. उन्होंने वन विभाग पर भी आरोप लगाया कि उसने ऐसे मिट्टी और पत्थर को रोकने के लिए गुवा प्रबंधन के खिलाफ जबाबदेही तय करने और पक्का चेकडैम का निर्माण क्यों नहीं कराती है.
खादान में दे 75 फीसदी लोकल युवाओं को रोजगार
राजू सांडिल ने कहा कि जब गुवा खादान से हमारे खेत, नदी-नाला प्रभावित और बंजर हो रहे हैं तो हम यहां के बेरोजगारों के लिये नौकरी मांग कौन सा अपराध कर रहे हैं. प्रबंधन को तमाम प्रभावित गांव के बेरोजगारों को खादान में 75 फीसदी रोजगार देना होगा. हम एक सप्ताह के बाद इस मामले को लेकर जिला परिषद, प्रमुख, मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि, मानकी, मुंडा आदि के साथ संयुक्त बैठक करेंगे. इसके बाद आगे आरपार की लडा़ई लड़ने की कार्य योजना बनायेंगे. उन्होंने कहा कि रानी चुआं क्षेत्र में गुवा प्रबंधन एक कच्चा चेकडैम बना रही है, जिसमें सारंडा के लगभग 20 मजदूरों को काम पर रखा गया है. उन्हें लगभग 500 रूपये की जगह मात्र 250 रूपये मजदूरी और कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया जा रहा है. गुवा प्रबंधन बताए कि सेल के कामों में एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी क्या है. कच्चा चेकडैम बरसात में बह जाती है.
हर साल किया जाता है चेक डैम का निर्माण
इस मामले में जब सेल गुवा खादान के उप महाप्रबंधक (सीएसआर) टीसी आनंद से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि हमलोगों ने बीते मार्च महीने में वन विभाग के कैंपा फंड में 6.50 (साढे़ छः) करोड़ रूपये जमा किया है. इस पैसे से वन विभाग को कंक्रिट का चेकडैम आदि बनाना है. खादान की मिट्टी बरसात में बाहर ना जाए. इस लिये प्रत्येक वर्ष रानी चुआं की तरफ कच्चा चेकडैम का निर्माण कराया जाता है. इस बार भी लोहे की जाली और पत्थर से चेकडैम का निर्माण कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मुखिया राजू सांडिल के पंचायत के कई गांव हमारे खादान से प्रभावित नहीं है. फिर भी वह नौकरी की मांग को लेकर ऐसा विवाद निरंतर खडा़ कर रहे हैं.
रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, गुवा(चाईबासा)
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