तो क्या झारखंड के चुनाव परिणाम से सबक लेते हुए भाजपा ने हरियाणा में मुख्यमंत्री को बदला है,पढ़िए पूरा विश्लेषण इस रिपोर्ट में

    तो क्या झारखंड के चुनाव परिणाम से सबक लेते हुए भाजपा ने हरियाणा में मुख्यमंत्री को बदला है,पढ़िए पूरा विश्लेषण इस रिपोर्ट में

    धनबाद (DHANBAD): 2019 के झारखंड में चुनाव परिणाम को देखते हुए, क्या हरियाणा में सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए मुख्यमंत्री बदला गया है.या फिर गठबंधन टूटने के बाद हालातो को अनुकूल करने के लिए यह सब किया गया है.वैसे प्रयोग के लिए भाजपा जानी जाती है. तो क्या हरियाणा में भी प्रयोग ही हुआ है या कोई दूसरी बात है. दरअसल, हरियाणा में भाजपा और जननायक जनता पार्टी गठबंधन की सरकार चला रही थी. यह गठबंधन 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद हुआ था. भाजपा 41 सीटों पर जीती थी. लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे थी. फिर जननायक जनता पार्टी से गठबंधन हुआ और मनोहर लाल खट्टर की सरकार बनी. लेकिन अब लोकसभा चुनाव में सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच तालमेल नहीं बैठा और यह गठबंधन टूट गया.

    भाजपा ने नहले पर दहला खेलते हुए हरियाणा में मुख्यमंत्री को बदला

    खट्टर सरकार में डिप्टी सीएम रहे जननायक जनता पार्टी के दुष्यत चौटाला लोकसभा की सीट हरियाणा में मांग रहे थे और इसी बात पर विवाद बढ़ा और उन्होंने समर्थन वापस ले लिया. फिर तो भाजपा ने नहले पर दहला खेलते हुए मुख्यमंत्री को ही बदल दिया. और नए मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी की शपथ हो गई. शपथ इसलिए हुई कि गठबंधन टूटने के बाद भी भाजपा सरकार पर कोई खतरा नहीं है. 90 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 विधायक चाहिए. भाजपा को छह निर्दलीय व हरियाणा लोकहित पार्टी के एक विधायक का भी समर्थन है. यानी भाजपा को बहुमत साबित करने में कोई खतरा नहीं है. हरियाणा सरकार का कार्यकाल 3 नवंबर तक है. अक्टूबर में विधानसभा का चुनाव संभावित है.

    लेकिन यहीं से सवाल उठता है कि क्या हरियाणा में एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा ने यह सब किया है. भाजपा पहले भी ऐसा करती रही है .गुजरात,त्रिपुरा, उत्तराखंड में ऐसा प्रयोग भाजपा कर चुकी है. झारखंड में 2019 के चुनाव के पहले दबाव था कि मुख्यमंत्री को बदल दिया जाए. लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया. नतीजा हुआ कि झारखंड में भाजपा की सरकार अपदस्त हो गई. वैसे खट्टर लगभग साढ़े नौ वर्ष तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. लगातार मुख्यमंत्री रहने पर सत्ता विरोधी लहर की स्थिति बन सकती थी. ऐसे में भाजपा ने नया प्रयोग करना ही उचित समझा. हो सकता है कि खट्टर को भाजपा लोकसभा का चुनाव लड़ा दे. जो भी हो लेकिन चुनाव के ठीक पहले इस तरह के परिवर्तन को सीधे चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

    रिपोर्ट. धनबाद ब्यूरो

     


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