रांची हिं'सा में घायल नदीम को इलाज के लिए दिल्ली भेजे जाने पर घिरी सरकार, जानिये किसने क्या कहा  

    रांची हिं'सा में घायल नदीम को इलाज के लिए दिल्ली भेजे जाने पर घिरी सरकार, जानिये किसने क्या कहा  

    रांची(RANCHI): रांची में 10 जून को हुआ एक विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। जिसमेंं पुलिस की ओर से हुई फायरिंग पर भी सवाल खड़े हुए थे. अब सवाल इसपर खड़े हो रहे हैं कि उस हिंसा में घायल एक युवक नदीम को बेहतर इलाज के लिए सरकार ने आज दिल्ली भेज दिया.

    आरोप है कि पत्थरबाजी के बाद पुलिस की फायरिंग में दाे किशोर की मौत हो गई थी, वहीं कई लड़के घायल हो गए थे. इनमें ही नदीम है, जिसका इलाज पिछले 14 दिनों से रिम्स में चल रहा था. नदीम की हालत दिन ब दिन खराब हो रही है. इसे देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए मेदांता गुड़गांव रेफ़र किया. नदीम के परिजनों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उसका इलाज बड़े अस्पताल में करवा सकें. जिसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से इलाज का पूरा खर्च उठा जा रहा है.    

    इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है. हमने इस संबंध में राजनीति और पत्रकरिता से जुड़े लोगों से बात की। दरअसल कहा जा रहा कि संभवत: झारखंड में यह पहला मामला है कि उपद्रव के एक आरोपी को इलाज के लिए एयररलिफ्ट कर बाहर भेजा गया। जिला प्रशासन कर ओर से बताया गया है कि किसी की जान बचाना हमलोगों की प्राथमिकता है. नदीम के गले में गोली लगी थी. जिससे वह कई दिनों से वेंटीलेटर पर है.

    भाजपा नेता सीपी सिंह से बात की तो उनका साफ कहना है कि किसी की जान बच जाए यह अच्छी बात है. लेकिन सरकार अगर दंगाइयों को एयरलिफ्ट कारायेगी तो समाज पर क्या असर पड़ेगा. आप समझ सकते हैं. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है.   


    वहीं इस मामले पे जब हमने कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा से राय जानने की कोशिश की तो उनका साफ कहना है किसी की जान बचना सरकार की प्राथमिकता है. ये सरकार की अच्छी पहल है. उन्होंने कहा कि घायल व्यक्ति कोई भी हो पहले हमें उसकी जान बचाने की कोशिश करनी है. हेमंत सरकार बेहतर कार्य कर रही है. इसी वजह से विपक्ष में खलबली मची हुई है.  

    रांची प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह कहते हैं कि सजा याफ्ता कैदी के स्वास्थ्य और चिकित्सा की जिम्मेदारी सरकार की होती है। यह उसका संवैधानिक अधिकार है। नदीम का तो अभी दोष भी सिद्ध नहीं हुआ है।


    झारखंड में आय दिन कई ऐसी घटनाएं होती हैं ,कई लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं, लेकिन सरकारी मदद उसे नहीं मिल पाती है. अब सवाल यह उठता है कि क्या नदीम को एयरलिफ्ट कराना  राजनीति फायदे के लिए तो नहीं.


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