आदिवासी पिच पर खेल रहे रघुवर दास ही होंगे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, दुमका सर्किट हाउस में मिले बाबूलाल मरांडी से, क्या पकी खिचड़ी, पढ़िए !

    आदिवासी पिच पर खेल रहे रघुवर दास ही होंगे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, दुमका सर्किट हाउस में मिले बाबूलाल मरांडी से, क्या पकी खिचड़ी, पढ़िए !

    धनबाद(DHANBAD) : 30 जून को हूल दिवस के पहले संथाल परगना में भाजपा के नेताओं के दौरे का क्या कोई राजनीतिक मतलब है? क्या रघुवर दास को केंद्रीय नेतृत्व से कोई निर्देश मिला है ?क्या रघुवर दास ही भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे?क्या रघुवर दास को आदिवासियों को भाजपा की ओर करने की जिम्मेवारी मिली है? क्या भाजपा के सभी आदिवासी नेता को इसकी जानकारी है? झारखंड बीजेपी में आखिर क्या चल रहा है ? यह सब ऐसे सवाल हैं, जो उठ रहे है. धनबाद पहुंची एक जानकारी के अनुसार आज रविवार को दुमका सर्किट हाउस में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की   मुलाकात हुई. इस दौरान नेताओं के बीच क्या-क्या चर्चा हुई, संगठन पर क्या बात हुई, राज्य की राजनीतिक हालातो पर क्या चर्चा हुई, इसकी तो पुख्ता जानकारी नहीं मिली है, लेकिन बताया जाता है कि संथाल परगना के मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई. 

     जिसके आधार पर भाजपा जनता के बीच पहुंच सके.  रघुवर दास दो दिनों के संथाल के दौरे पर हैं, वहीं बाबूलाल मरांडी रविवार को  सुबह दुमका पहुंचे है.  बता दें कि संथाल परगना को साधना भाजपा के लिए बहुत ही जरूरी है.  लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन संथाल परगना में बहुत कमजोर रहा.  लोकसभा में भाजपा को पहले जीती हुई सीट भी गवा देनी पड़ी थी.  वहीं विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को बुरी हार का सामना करना पड़ा था.  हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा में गुटबाजी हावी थी.  भाजपा अभी भी इससे उबर  नहीं पाई है.  रघुवर दास 21 जून को पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा में एक आदिवासी संगठन द्वारा आयोजित जन चौपाल कार्यक्रम में शामिल हुए थे.  

    आज रघुवर दास साहिबगंज के भोगनाडीह में अमर शहीद  सिद्धू कान्हू मुर्मू के वंशजों से भेंट किये है.  बरहेट में जन चौपाल कार्यक्रम में भी जनता से सीधे संवाद का उनका कार्यक्रम था. इधर, रघुवर दास ने कहा है कि भोगनाडी में शहीद सिद्धू  कान्हू मुर्मू  स्मृति स्थल की स्थिति देखकर दुख और रोष  उत्पन्न हुआ. हमारी सरकार ने इसका निर्माण करवाया था.  यह  एक तीर्थ स्थल से कम नहीं है. जहां हमारे आदिवासी वीरों ने बलिदान दिया था. लेकिन आज इसकी स्थिति बिल्कुल दयनीय हो गई है. मैं स्थानीय उपायुक्त  से फोन पर बात कर इसकी नियमित देखरेख करने का आग्रह किया.  30 जून को हूल दिवस के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में लोग आएंगे, यह  पूजनीय स्थल बिल्कुल साफ सुथरा होना चाहिए.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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