स्त्रियों की भगीदारी के बिना कोई आंदोलन सफल नहीं, जानिए आदिवासी महिला नेटवर्क में किन बातों की हुई चर्चा

    स्त्रियों की भगीदारी के बिना कोई आंदोलन सफल नहीं, जानिए आदिवासी महिला नेटवर्क में किन बातों की हुई चर्चा

    रांची (RANCHI): आदिवासी महिला नेटवर्क ने "झारखंड में हुए आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका" विषय पर मंगलवार को एक परिचर्चा का आयोजन किया. यह चर्चा 16 दिनों की सक्रियता के अवसर पर आयोजित की गई थी जो 10 दिसंबर 2022 को मानवाधिकार दिवस तक जारी रहेगी. आज के विषय पर बोलते हुए, संजय बसु मलिक ने बताया कि कैसे झारखंड राज्य का अलगाववादी आंदोलन एक सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति से आया है जिसमें महिलाओं ने एक आवश्यक भूमिका निभाई है. साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी आंदोलन की सफलता संभव नहीं है.

    राजनीति में बढ़े महिलाओं की भागीदारी : बारला

    जनआंदोलन की चर्चा करते हुए दयामणि बारला ने विस्थापन के खिलाफ संघर्ष में महिलाओं की ईमानदार दृष्टि और नेतृत्व की चर्चा की. उन्होंने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत भी बताई. रेणु दीवान ने राजनीतिक दलों में महिलाओं की राय और दृष्टि की अस्वीकृति को निराशाजनक बताया. 

    महिलाओं को किया गया सम्मानित

    आज के आयोजन में नेहतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज आंदोलन की प्रमुख महिला नेताओं- तर्शिला खलखो, मगदली कुजूर, इग्नाटियस ऐंड, एमिलिया किस्पोट्टा की भूमिका को भी स्वीकार किया गया और सम्मानित किया गया. जेरोम गेराल्ड कुजूर, हीरा मिंज, मैरी निशा हंसदा, दिनेश मुर्मू जैसे नेताओं ने भी अपने दृष्टिकोण साझा किए. कार्यक्रम का संचालन एलिना होरो ने किया.


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