Lok sabha election 2024: बड़े ,छोटे और पड़ोसी भाई के मुख्यमंत्रियों के लिए अग्निपथ हो सकता है यह चुनाव,पढ़िए पूरा विश्लेषण

    Lok sabha election 2024: बड़े ,छोटे और पड़ोसी भाई के मुख्यमंत्रियों के लिए अग्निपथ हो सकता है यह चुनाव,पढ़िए पूरा विश्लेषण

    धनबाद(DHANBAD):धनबाद बड़े भाई ,छोटे भाई और पड़ोसी भाई यानी बिहार, झारखंड और ओडिसा के मुख्यमंत्री के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा.केवल साख का ही सवाल नही है,बल्कि राजनीतिक भविष्य का भी प्रश्न होगा.लोकसभा का परिणाम ही इनके आगे का दिन तय करेगा.  उनकी राजनीति की दिशा और दशा तय करेगा. बात की शुरुआत बिहार से ही करते हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से एनडीए में शामिल हो गए हैं. लेकिन यह चुनाव उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी. अगर लोकसभा चुनाव में उनका परफॉर्मेंस ठीक नहीं होगा, तो आगे भाजपा से मोलभाव करने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे. वैसे भी कैबिनेट विस्तार को लेकर विधायक नाराज चल रहे हैं. खराब प्रदर्शन हुआ तो उनकी राजनीति मुश्किल में पड़ सकती है.   

    चंपई सोरेन के लिए भी 2024 का लोकसभा चुनाव अग्निपथ के समान होगा

      झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के लिए भी 2024 का लोकसभा चुनाव अग्निपथ के समान होगा.अगर लोकसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा तो उनके खिलाफ भी माहौल बन सकता है. विधायक भी नाराज चल रहे हैं. कांग्रेस के विधायक तो दिल्ली तक चले गए थे .लेकिन वहां से मिली सलाह के बाद झारखंड लौट आए और चुनाव की तैयारी में लग गए हैं. इधर सीता सोरेन ने भाजपा में शामिल होकर झारखंड मुक्ति मोर्चा को करारा झटका दिया है. इस झटके से अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा उबरता नहीं दिख रहा है. यह अलग बात है कि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन राजनीति के क्षेत्र में कदम रख दिया है और वह तेजी से आगे बढ़ रही है. लेकिन उड़ीसा से आने वाली दोनों गोतनी(सीता सोरेन और कल्पना सोरेन) में तनातनी का माहौल धीरे-धीरे तेज होता दिख रहा है.   

    वैसे कांग्रेस ने बीजेपी के जेपी भाई पटेल को तोड़ कर जवाब देने की कोशिश की है

      वैसे कांग्रेस ने बीजेपी के जेपी भाई पटेल को तोड़ कर जवाब देने की कोशिश की है.इसी तरह ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की भी राजनीति दांव पर लगी हुई है. अब तक ओडिसा की राजनीति में बेताज बादशाह रहे 77 साल के नवीन पटनायक की भी डगर मुश्किल दिख रही है. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ हो रहे हैं. ऐसे में अगर नवीन पटनायक और उनकी पार्टी का परफॉर्मेंस बेहतर नहीं हुआ तो  वहां भी खरमंडल हो सकता है. बीजेपी के साथ नवीन पटनायक का समझौता नहीं हुआ. अब वहां चुनाव त्रिकोणीय हो सकते हैं और ऐसे क्या परिस्थितियों बनेगी इसपर सभी की निगाहें टिकी रहेगी.   

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो                                                   


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