लोहरदगा : हाथी के हमले से अब तक जा चुकी सात लोगों की जान, मुआवजा बांटने में लगी है वन विभाग

    लोहरदगा : हाथी के हमले से अब तक जा चुकी सात लोगों की जान, मुआवजा बांटने में लगी है वन विभाग

    लोहरदगा (LOHARDAGA) : लोहरदगा में बीते दिनों से एक अकेले हाथी ने आतंक मचा रखा है. हाथी लोहरदगा के विभिन्न क्षेत्रों में भम्रण कर कोहराम मचा रहा है. सोमवार देर रात हाथी भंडरा थाना क्षेत्र से भटकता हुआ बेड़ो थाना इलाके पहुंचा और कुचलकर दो ग्रामीणों की हत्या कर दी. इससे पहले हाथी ने कुडू थाना क्षेत्र और भंडरा थाना क्षेत्र के पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. जिसमें कुडू थाना क्षेत्र के मसीयातू गांव की एक महिला और भंडरा थाना क्षेत्र के कसपुर लड़ाई टंगरा की दो महिला समेत चार लोगों शामिल हैं. अकेला हाथी अब तक सात लोगों की जान ले चुका है. वन विभाग ने हर मृतक के परिवार को तत्काल 25-25 हजार रुपए मुआवजा दिया है. साथ ही सभी आश्रितों के खातें में 3 लाख 75 हजार रुपए मुआवजा के तौर पर और राशि मिलेगी.

    जंगलों की कटाई के कारण उत्पन्न हुई ये स्थिति

    पूरे मामले में वनरक्षी का कहना है कि जंगलों की कटाई की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है लेकिन इनके द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि इस हाथी को सुरक्षित जंगलों में पहुंचाया जाए. इसके लिए पुरुलिया से हाथी भगाने के लिए दो विशेष टीम को लोहरदगा बुलाया गया. और पचिम बंगाल के पुरलिया और बाकूड़ा से 15 सदस्य दल लोहरदगा पहुंच कर हाथी को ग्रामीण इलाकों से दूर जंगलों तक खदेड़े के काम में लगे हैं. वहीं हाथी के लगातार आतंक के कारण लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं. पहली बार लोहरदगा में हाथी ने चौबीस घंटे के अंदर 7 लोगों को मौत के घाट उतारा है. वन विभाग ने हर मृतक के परिवार को तत्काल 25-25 हजार रुपए मुआवजा दिया है. साथ ही सभी आश्रितों के खातें में 3 लाख 75 हजार रुपए मुआवजा के तौर पर और राशि मिलेगी.

    बीते पांच सालों में 462 लोगों की मौत

    मीडिया रिपोर्ट से अनुसार झारखंड में इस साल जनवरी महीने में ही हाथियों के हमले में पांच लोगों की जान चली गई. आरटीआई के तहत मिली जानकारी के जवाब में पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि साल 2017 से अब तक हाथियों के हमले में झारखंड में ही 462 लोगों की जान गई है. वहीं बीते साल 2022 में हाथियों के हमले से 133 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में कहा जा सकता है कि हाथियों के हमले से हो रहे मौत के आकड़ों में कोई कमी नहीं आई है. हालांकि इन घटनाओं के कारणों की बात करें तो इसका जिम्मेदार हाथियों के गुड़रने वाले कॉरिडोर्स पर अतिक्रमण, जंगली जानवरों के लिए घटता खाना और रहने की जगह, जंगल में आग लगने की घटनाएं और माओवादी और सुरक्षाबलों के बीच लगातार मुठभेड़ की घटनाएं हो सकती हैं. हालांकि राज्य सरकार के अनुसार, राज्य में 2015 से 2021 के बीच वनक्षेत्र 23,478 वर्गकिलोमीटर से बढ़कर 23,716 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ गया है. लेकिन इसके बावजूद इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की घटनाएं घटी नहीं बल्कि बढ़ी हैं. 

    रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा


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