1932 पर खुद को अकेला महसूस करेंगे लोबिन,टाइगर को याद कर हुए भावुक


रांची(RANCHI): झारखंड के राजनीति का एक सितारा आज दुनिया को अलविदा कह दिया है. टाइगर के निधन से पूरा झारखंड शोक में डूबा है. सभी उनके साथ बिताए पल को याद कर भावुक हो रहे है. बात जब जगरनाथ महतो की आती है तो सबसे पहले 1932 स्थानीय नीति,नियोजन नीति जरूर सामने आता है.1932 पर मुखर होकर टाइगर आवाज उठाते थे. झामुमो विधायक लोबिन हेमब्रम याद करते हुए भावुक हो गए. लोबिन ने कहा कि आदिवासी मूलवासी की लड़ाई अब खुद को अकेले महसूस करेंगे.
लोबिन हेंमब्रम ने कहा कि जब कभी भी टाइगर से मुलाकात होती उन्हे दादा कह कर पुकारते थे. उन्होंने कहा कि दुनिया में जो आया है उसे जाना तय है. लेकिन जब कोई कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह देता है तो वह दर्द ज्यादा होता है. उन्होंने कहा कि जगरनाथ महतो से उनका लगाव निजी था,जब वह मिलते थे जगरनाथ महतो उनका हाल पूछते थे.उनके निधन से उन्हे निजी नुकसान हुआ है.उनकी कमी पूरे झारखंड में कोई पूरी नहीं कर सकता है. पूरा झारखंड आज उदास है और उन्हे याद कर रहा है.
जब कभी मिलते थे तब उन्हे बोलते थे की तबीयत खराब है इसपर जगरनाथ जवाब देते थे की मंत्री का पद आराम के लिए नहीं है. हम जनता के सुख दुख को बाटने के लिए प्रतिनिधि बने है उनका काम छोड़ कर आराम कैसे कर सकते थे. लोबिन उन्हे याद कर काफी भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ की वह किसी मंत्री से बात कर रहे है. हमेशा एक छोटा भाई और दोस्त के जैसे हम दोनों रहे.टाइगर भले हम सब को छोड़ कर चले गए.लेकिन सभी के दिल में हमेशा आप जिंदा रहेंगे.
लोबिन ने कहा कि जब उपचुनाव होगा तो सभी राजनीतिक दल पार्टी से ऊपर उठ कर वहां अपना प्रत्याशी ना दे. उनके परिवार के किसी सदस्य को ही उम्मीदवार बना कर सभी दल उसे समर्थन दे कर. उन्हे सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
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