बाबा के दर्शन के लिए देवघर पहुंचे लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता, ज्योतिर्लिंग का किया जलाभिषेक

    बाबा के दर्शन के लिए देवघर पहुंचे लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता, ज्योतिर्लिंग का किया जलाभिषेक

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : देवघर का बाब मंदिर एक ऐसा तीर्थ स्थल है जहां की मान्यता अपरंपार है. दूर- दूर से लोग यहाँ बाबा का दर्शन करने पहुंचते है. इसी क्रम में थल सेना के पूर्वी सेना कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता आज बाबा के दरबार यानि देवघर पहुंचे. यहाँ वो अकेले नहीं बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचे. बाबा मंदिर में पहुँच कर उन्होंने  पूजा अर्चना की. मंदिर पहुंचने पर मंदिर प्रबंधन की ओर से उनका स्वागत किया गया. वहीं काली मंदिर के पुरोहितों द्वारा पूरे वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चारण के साथ लेफ्टिनेंट जनरल को पूजा का संकल्प कराया गया.

    विश्व में शांति की कामना

    लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने मंत्रोच्चारण के बाद गर्भगृह पहुंच कर पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की. लेफ्टिनेंट ने बताया की इस पूजा में उन्होंने पूरे विश्व में शांति,देश अत्यधिक शक्तिशाली बने,देश और देशवासियों का कल्याण,सुख समृद्धि की कामना बाबा बैद्यनाथ से की. पूजा अर्चना के दौरान सेना के अधिकारी, मंदिर प्रशासन और तीर्थ पुरोहित भी वहाँ मौजूद रहे.

    देवघर की मान्यता

    यहाँ की मान्यता है कि बाबा भोले के भक्त जब सावन में बाबा बैजनाथ मंदिर में कांवर लेकर आते हैं तो उन्हें शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद मिलता है. इसलिए द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैजनाथ के मंदिर को शक्तिपीठ भी कहा जाता है. सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु भगवान भोले शंकर को जल चढ़ने के लिए पहुंचते हैं

    इस वजह से देवघर को कहा जाता है शक्तिपीठ

    वेदों में वर्णित है कि राजा दक्ष के महायज्ञ में शिव को नहीं बुलाए जाने पर माता सती रुष्ट हो गई थीं और अग्निकुंड में खुद को समाहित कर लिया था. जिसके बाद भगवान शिव क्रोधित होकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव करने लगे थे. शिव के इस क्रोध को देखकर सभी देव डर गए, क्योंकि शिव के इस गुस्से से प्रलय या जाता. ऐसे में भगवान विष्णु के चक्र से सती के शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए जहां जहां भी शरीर का हिस्सा गिरा व शक्तिपीठ कहलाया. देवघर बैद्यनाथ धाम में माता का हृदय कटकर गिरा था इसलिए इसे शक्तिपीठ भी कहा जाता है.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 


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