झारखंड: भाजपा नेताओं को गिरफ्तार करने पर रोक,हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा

    झारखंड: भाजपा नेताओं को गिरफ्तार करने पर रोक,हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा

    रांची - 23 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से युवा आक्रोश रैली का आयोजन किया गया था. इस रैली में प्रदेश स्तर के कई बड़े नेता शामिल हुए. विधायक, सांसद सभी लोग शामिल हुए थे. रैली के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का कार्यक्रम था. इसके लिए भाजपा के नेता कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए. वाटर कैनन से पानी बरसाया गया. कई नेता कार्यकर्ता घायल भी हुए. पुलिस का भी आरोप था कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनके ऊपर रोड़े बाजी की. इससे कई पुलिस वाले घायल हो गए.

    भाजपा नेताओं पर प्रशासन ने विभिन्न गैर जमानत लिए धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था.यह मुकदमा लालपुर थाना में दर्ज कराया गया. कुल 52 नेताओं पर नामजद प्राथमिक दर्ज कराई गई थी. इसके अलावा 12000 अज्ञात को भी उपयुक्त बनाया गया था. प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के खिलाफ भाजपा के नेता झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाए.

    हाई कोर्ट ने भाजपा नेताओं की अर्जी पर क्या दिया आदेश

     23 अगस्त को युवा आक्रोश रैली के दौरान भाजपा नेताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया था जिनमें बाबूलाल मरांडी,कर्मवीर सिंह, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू, ढुल्लू महतो,अमर कुमार बावरी, कुशवाहा शशि भूषण, अपर्णा सेनगुप्ता, मीरा यादव, शशांक राज, प्रतुल शाहदेव ,मंगल मूर्ति तिवारी, सत्येंद्र नाथ तिवारी, अमित कुमार अमरदीप यादव,आरती कुजूर, वरुण कुमार, इंदु शेखर मिश्रा समेत अन्य शामिल थे.

    भाजपा नेताओं ने उच्च न्यायालय में अर्जी दायर की है. इस पर कोर्ट ने फिलहाल 18 भाजपा नेताओं के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है. भाजपा विधि प्रकोष्ठ के संयोजक और अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि लालपुर थाना में कार्यपालक दंडाधिकारी संजय कुमार के आवेदन पर भाजपा नेताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया था जिसमें हत्या का प्रयास की भी धारा लगाई गई थी. जबकि पुलिस ने भाजपा नेताओं की भीड़ पर आंसू गैस के गोले, रबर बुलेट चलाया और लाठियों से प्रहार किया. इस घटना में भाजपा के कई नेता घायल हुए और अस्पताल में भी भर्ती हुए. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 3 सप्ताह के अंदर इस मामले में शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया है.


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