झारखंड में कैसे खतरे में है जल, जंगल, जमीन और जिंदगी, हाथी और आवारा पशु खतरा भी हैं और खतरे में भी 

    झारखंड में कैसे खतरे में है जल, जंगल, जमीन और जिंदगी, हाथी और आवारा पशु खतरा भी हैं और खतरे में भी 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड में जल, जंगल, जमीन, पशु खतरे में है. यह जानवर खुद तो असुरक्षित हैं ही, लोगों को भी असुरक्षित किए हुए हैं. जंगली और ग्रामीण इलाकों में हाथियों का उत्पात है तो शहर में आवारा पशुओं की चहल कदमी. इस पर कोई नियंत्रण नहीं लग पा रहा है. एक तरफ हाथी जंगल में मर भी रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी वन क्षेत्र में करंट से पांच हाथियों की मौत हो गई. इसके बाद भी हाथियों के कॉरिडोर पर कोई सुगबुगाहट नहीं है.

    10, 12 दिनों से हाथियों का झुंड धनबाद के टुंडी में उत्पात मचा रहा 

    पिछले दो दशक से हाथियों का झुंड धनबाद, गिरिडीह और जामताड़ा के जंगलों में घूम रहा है. हर जिला अपने क्षेत्र से हाथियों के झुंड को दूसरे जिले में प्रवेश करा देता है और बैठ जाता है. लेकिन हाथियों का यह झुंड कभी दूसरे जिले में प्रवेश कर जाता है और फिर लौट आता है. पिछले 10, 12 दिनों से हाथियों का झुंड धनबाद के टुंडी में उत्पात मचाने के बाद जामताड़ा इलाका में प्रवेश कर गया. यह झुंड गिरिडीह से धनबाद में प्रवेश किया था.

    टुंडी और जामताड़ा में हाथियों ने ली जान 

    धनबाद की टुंडी में दो लोगों की जान लेने के बाद जामताड़ा में हाथियों का यह झुंड दादा और पोती को कुचलकर मार दिया. तीनों जिलों के वन विभाग के अधिकारी सिर्फ इतना ही करते हैं कि अपने जिले की सीमा से हाथियों को बाहर कर देते हैं. लेकिन हाथियों से निपटने के लिए और हाथियों को सुरक्षित रखने के लिए न केंद्र सरकार और न हीं राज्य सरकार के पास कोई पुख्ता योजना है. कहते हैं कि झारखंड बनने के बाद से ही धनबाद जिले में हाथियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया था.

    झारखंड सरकार ने कॉरिडोर की योजना बनाई लेकिन इस पर कुछ काम नहीं हुआ 

    झारखंड बने 23 साल हो गए लेकिन हाथियों से कैसे बचा जाए, हाथियों को कैसे सुरक्षित रखा जाए, इसके लिए जो भी योजना बनी, वह अभी भी फाइलों में कैद है. कोई सशक्त जरिया भी वन विभाग के पास नहीं है, जिससे ग्रामीणों को हाथियों से वह बचा सके. मुट्ठी भर मशालची हाथियों के आगे विवश और लाचार दिखते हैं. टुंडी इलाके में हाथियों  का डर तो ऐसा है कि लोग अब अपने परिवार वालों को दूर रिश्तेदारों के घर भेजना शुरू कर दिया है. झारखंड सरकार ने कॉरिडोर की योजना बनाई लेकिन इस पर कुछ काम नहीं हुआ. योजना धरी की धरी रह गई .इस योजना को न स्वीकृति मिली और न हीं इसे रिजेक्ट किया गया .यह तो हुई हाथियों की बात.

    शहर में आवारा पशुओं का उत्पात भी जारी 

    शहर में आवारा पशुओं का उत्पात भी उसी अनुपात में बढ़ा हुआ है. धनबाद नगर निगम ने पहले एक एजेंसी से आवारा पशुओं को पकड़कर गौशाला में देने के लिए करार किया, लेकिन यह करार भी टूट गया. नतीजा है कि आवारा पशु शहरियों को परेशान कर रखा है. धनबाद में तो हालत यह है कि यह आवारा पशु सड़क पर खड़ा होकर ट्रैफिक रोक देते हैं. हाट, बाजार में इनका प्रवेश होता है. इनका दबदबा होता है, लेकिन इसे छुटकारा दिलाने की दिशा में कोई काम होता नहीं है. जंगली हाथी और आवारा पशु समस्या बन गए हैं. जब कभी कोई घटना होती है तो जनप्रतिनिधि, अधिकारी पहुंचते हैं, दुख व्यक्त करते हैं, आश्वासन देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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