हूल दिवस की खुशियां हर तरफ लेकिन वंशज आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

    हूल दिवस की खुशियां हर तरफ लेकिन वंशज आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

    रांची(RANCHI): हूल दिवस पूरे झारखंड में धूम धाम से मनाया जा रहा है. लेकिन संताल हूल के नायक सिदो कान्हू के वंशज का कोई सुध लेने वाला नहीं है. वह आज भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सरकार महानायकों के नाम पर बड़ी-बड़ी बाते करती है. लेकिन जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल परे है. सीदो के वंशज मण्डल मुर्मू ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है. मगर वह बेरोजगार है. मण्डल बताते हैं सरकार से हर बार आश्वासन मिला, लेकिन रोजगार नहीं. परिवार के सभी सदस्यों ने स्नातक तक की पढ़ाई किया है. जो सभी रोजगार की तलाश में आज भी है.

    सीदो के वंशजों में 81 से अधिक सदस्य है. जो आज भी मूलभूत सुविधायों से वंचित है. सभी परिवार के लोग ज्यादातर खेतीबाड़ी पर निर्भर करते हैं. अगर सुखाड़ पड़ गया तो उस वर्ष खाने की सोचना पड़ता है. झारखंड में पक्ष और विपक्ष सभी महानायकों के नाम पर राजनीति रोटी सेकती है. लेकिन वह किस हाल में है उससे उन्हे लेना देना नहीं है.

    सिर्फ सीदो कान्हू ही नहीं शहीद नीलांबर पीताम्बर के वंशज भी आज अपने जीवन की गाड़ी मुश्किलों से चला रहे हैं. नीलांबर पीताम्बर के परिवार के लोगों से भी कई वायदे किये गए थे. लेकिन आज भी वह मूलभूत सुविधाए से वंचित हैं.                       


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