झारखंड में पेड़ों को बांधी जाती है राखी, जानिये इस अनूठे रक्षाबंधन के बारे में 

    झारखंड में पेड़ों को बांधी जाती है राखी, जानिये इस अनूठे रक्षाबंधन के बारे में 

    सिमडेगा (SIMDEGA): सावन सोमवारी के बाद भाई-बहनों के पावन पर्व रक्षाबंधन की फिजा बनने लगती है. लेकिन अपने झारखंड में इस पर्व पर एक अनूठी परंपरा बरसों से चली आ रही है. पूर्वी सिंहभूम के बाद अब सिमडेगा जिले में इसका आगाज हो चुका है. पेड़ों को ही राखी बांधी जा रही है.

    सिमडेगा के कोलेबिरा वन विभाग ने आनोखे तरीके से रक्षाबंधव का त्यौहार मनाया है. विभाग ने केउन्दपानी पीएफ में वृहस्पतिवार को वृक्ष रक्षाबंधन उत्सव मनाया गया. वन क्षेत्र पदाधिकारी रामेश्वर पासवान के अलावा वन परिसर पदाधिकारी अनुज मिंज वन कर्मी नीतीश कुमार हेमंत कुमार मनोज कच्छप, प्रदीप कुल्लू, सत्येंद्र बड़ाईक, जयवंत प्रशुन केरकेट्टा ने वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधा. पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों का संरक्षण का संकल्प लिया.

    पर्यावरण रक्षा की पहल

    मौके पर मौजूद राजेश्वर पासवान ने कहा कि पर्यावरण संतुलन में पेड़-पौधों की भूमिका अहम है. ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को देखते हुए पौधरोपण जरुरी है. सभी लोग एक-एक पेड़ लगाने और उसकी रक्षा का संकल्प लें. तभी पर्यावरण ठीक रहेगा. कहा कि रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई से उपहार के तौर पर वृक्ष मांगें ताकि रक्षा करने के लिए भाई हमेशा तत्पर रहते हैं, वैसे ही वृक्षों की रक्षा के लिए तत्परता जरुरी है. वृक्ष हमारे धरोहर हैं, इसके बिना हम अधूरे हैं. मानव जीवन का सबसे जरुरी और महत्वपूर्ण ऑक्सीजन हमें वृक्ष से प्राप्त होता है. अगर वृक्ष नही रहेंगे तो एक पल जीने का कल्पना भी नहीं की जा सकती है. इस अवसर पर बोकबा-टकबा और बोंगराम के ग्रामीण मौजूद रहे.

    पद्मश्री जमुना टुटू भी हर साल पेड़ों को बांधती हैं राखी

    पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया की रहने वाली पद्मश्री जमुना टुटू भी पिछले 25 सालों से पेडों को राखी बांध कर उनकी रक्षा करती आयी हैं. पेड़ों की रक्षा और ग्रामीणों को जागरूक करने के एवज में ही भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री के अवार्ड से सम्मानित किया है. रक्षा बंधन के दिन जमुना टुडू अपने वन महिला समितियों के साथ हर साल रक्षा बंधन के त्योहार पर पेड़ों पर राखी बांधती हैं. जमुना टुडू का मानना है कि जबतक जीवन रहेगा तबतक वे जंगल की रक्षा करते रहेंगी. इसकी शुरुआत 1995 में हुई थी, लेकिन आज लोग जागरूक हो गये हैं. लोगों को जागरूक करने का ही नतीजा है कि अब जिला के हर गांव में वन रक्षा समिति के जरिये सुनसुनिया जंगल की रक्षा की जा रही है. रक्षा बंधन के दिन वे हर साल पेड़ पर राखी बांधकर संकल्प लेती है कि वे पेड़ की रक्षा करती रहेंगी.

    रिपोर्ट: अमित रंजन, सिमडेगा


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