आजादी की 76 साल के बाद भी विकास से कोसों दूर है गिरिडीह का ये गांव, आज भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहें ग्रामीण

    आजादी की 76 साल के बाद भी विकास से कोसों दूर है गिरिडीह का ये गांव, आज भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहें ग्रामीण

    गिरिडीह(GIRIDIH): गिरिडीह का पारसनाथ पहाड़ विश्व प्रसिद्ध है.जहां जैन धर्म के साथ अन्य धर्म के लाखों लोग हर साल यहां पहुंचते है, लेकिन आजादी के 76 साल बाद भी इसी गिरिडीह के पीरटांड़ प्रखंड के कई इलाके आज भी विकास से कोसों दूर है, यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से महरूम है.इस क्षेत्र में एक समय नक्सलवादियों का बोलबाला होता था, लेकिन समय दर समय सरकार की नक्सलियों के प्रति  लाई पॉलिसी ने नक्सलियों को आत्म समर्पण करने को मजबूर किया, फलस्वरुप आज यह क्षेत्र शांत वातावरण में फल फूल रहा है, लेकिन मौलिक सुविधाएं आज भी इन गांवो में नहीं है.

    सड़क तक दी नहीं है सुविधा

    सरकार द्वारा संचालित सड़क ,पुल ,आवास ,पेंशन ,राशन मुर्गी सेड,बकरी सेड, आदि कई योजनाएं हैं लेकिन इन योजनाओं का लाभ यहां के ग्रामीण नहीं ले पाते हैं.भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा सड़क निर्माण की कई योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन पीरटांड़ के कई ऐसे इलाके हैं जहां इन योजनाओं का कोई आता पता ही नहीं है. फलस्वरुप आज भी लोग पगडंडियों में चलने को मजबूर हैं.सड़क नहीं रहने की वजह से आज भी यहां के ग्रामीण जब बीमार पड़ते हैं तो खाट के सहारे उन्हें अस्पताल लाया जाता है. ऐसा ही ताजा मामला रविवार को देखा गया.

    आज भी मरीजों को खाट पर लेटाकर अस्पताल पहुंचाया जाता है

    दरअसल पूरा मामला प्रखंड के मधुबन पंचायत के डहिया दलुवाडीह गांव का है.जहां ग्रामीण महिला मनीषा देवी रविवार की सुबह पानी लाने गई और गिर गई ,गिरने की वजह से उसका हाथ टूट गया,लोगों ने किसी तरह उसे इलाज करवाने के लिए खाट में लेटा करगांव से सड़क तक लाया और कार के माध्यम से सीधे धनबाद ईलाज के लिए रवाना किया गया.ऐसी घटनाएं आज की नहीं है बल्कि वर्षों से यहां के लोग इसी प्रकार की जिंदगी जिया करते हैं. आपको बताये कि इस गांव में दो नदियां हैं और बाकी पथरीला इलाका है.  नदी में ना पुल है और ना ही सड़क की सुविधा है.जिसकी वजह से यहां के ग्रामीण समस्याओं से परेशान है.कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने की वजह से लोगों की जान चली जाती है.

    पढ़ें ग्रामीणों ने क्या कहा

    ग्रामीणों का कहना है कि कई बार गांव में बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ जिला प्रशासन को भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. आज भी लोग अभाव में मर रहे हैं इतना ही नहीं पारसनाथ पहाड़ के तराई वाले इलाके में आज भी ऐसे कई गांव है जहां पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है, जिसकी वजह से बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही है.अगर समय रहते इन क्षेत्रों के विकास के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ जिला प्रशासन अहम कदम नहीं उठाती है तो यह क्षेत्र विकास से कोसों दूर रहेगा और यहां की जनता को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा.

    रिपोर्ट-दिनेश कुमार रजक


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