COAL INDIA :अब पूरी तरह से क्यों कारपोरेट लुक में दिखेगी कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियां !

धनबाद (DHANBAD) : देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाइयां अब पूरी तरह से कॉरपोरेट लुक में नजर आएंगी. ड्रेस कोड का निर्णय होने के बाद कार्मिक विभाग के कर्मी और अधिकारियों को एचआर यानी हुमन रिसोर्स पद नाम देने का निर्णय हो चुका है. इस संबंध पत्र भी जारी कर दिया गया है. अब कोल इंडिया में कार्मिक शब्द इतिहास बन जाएगा. अब कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाइयों में पदस्थापित कार्मिक विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एचआर अधिकारी कहलाएंगे, डायरेक्ट पर्सनल अब डायरेक्टर एचआर और कार्मिक महाप्रबंधक, महाप्रबंधक एचआर कहलाएंगे. वैसे सूत्र बताते हैं कि बदलाव करने का निर्णय कंपनी की 50वीं वर्षगांठ पर ले लिया गया था.
मैनेजमेंट ने जारी कर दिया है पत्र
लेकिन इससे सम्बंधित पत्र अब जारी किया गया है. पत्र के अनुसार कोल इंडिया बोर्ड ने इसकी मंजूरी दे दी है. अब कोल इंडिया का मानव संसाधन विभाग कर्मचारी संबंधित मामलों को सीधे देखेगा. अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेवारी होगी. कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा. कंपनी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने और भविष्य के लिए एक कुशल मैन पावर तैयार करने की दिशा में काम करेगा. कोल इंडिया बोर्ड ने इस बदलाव को मंजूरी देते हुए कहा है कि यह बदलाव कंपनी के दीर्घकालिक सफलता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है.
ठेका श्रमिकों के लिए भी होगा ड्रेस कोड
इधर, पिछले शुक्रवार को कोल इंडिया अपेक्स बोर्ड की हुई बैठक में कोयला कामगारों के लिए ड्रेस कोड पर निर्णय ले लिया गया है. ड्रेस कोड के रंग को निर्धारित करने के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी. कमेटी निर्णय करेगी कि ड्रेस का रंग कौन सा होगा. ड्रेस कोड सिर्फ कंपनी केवल अधिकारी और कामगारों पर ही लागू नहीं होगा, बल्कि ठेका श्रमिकों पर भी लागू किया जाएगा. ड्रेस कोड में जूता भी उपलब्ध कराया जाएगा. ड्रेस कोड के धुलाई के लिए वॉशिंग भत्ता भी कमेटी तय करेगी. फिलहाल कोल इंडिया में बदलाव का स्वरुप जारी है. कर्मचारियों की चिकित्सा सुविधा में भी बढ़ोतरी की गई है. अभी हाल ही में कोल इंडिया मैनेजमेंट ने कर्मचारियों के लिए एक और बड़ी राहत की घोषणा की है. लिवर सिरोसिस को गंभीर बीमारी में शामिल कर लिया है. शुक्रवार को कोल इंडिया मैनेजमेंट और यूनियन के बीच हुई बैठक में इस पर सहमति बन गई है. थोड़ा बहुत जो पेंच है, उसे भी सुलझा लिया जाएगा. ड्रेस कोड लागू करने के लिए एक समिति बनेगी.
अब कमेटी तय करेगी कि ड्रेस का रंग कौन सा होगा
कमेटी ही तय करेगी कि ड्रेस का रंग कैसा होगा. अधिकारियों को भी ड्रेस कोड के दायरे में लाया जाएगा. ड्रेस का खर्च, वॉशिंग खर्च कंपनी वहन करेगी. कर्मियों को जूता भी उपलब्ध कराया जाएगा. कोल इंडिया मैनेजमेंट लिवर सिरोसिस से पीड़ित कोयलाकर्मियों को भी अब बिना ड्यूटी आधा वेतन देगी. पीड़ित कर्मी जब तक फ़ीट घोषित नहीं किए जाएंगे, उन्हें आधा वेतन मिलता रहेगा. अधिसूचना के मुताबिक जेबीसीसीआई-11 की चौथी मानकीकरण समिति की बैठक में इस पर सहमति बनी थी. अब लिवर सिरोसिस को क्रिटिकल श्रेणी की बीमारी में कोल इंडिया ने शामिल कर लिया है. पहले क्रिटिकल श्रेणी में सात रोग मसलन हृदय रोग, कैंसर, लेप्रोसी, लकवा, ब्रेन से संबंधित रोग आदि शामिल थे. आठवें रोग के रूप में लिवर सिरोसिस को शामिल किया गया है.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
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