चंद रुपयों की खातिर सुहागन बन गई विधवा !

    चंद रुपयों की खातिर सुहागन बन गई विधवा !

    दुमका (DUMKA) : किसी ने सच ही कहा है कि पैसा भगवान तो नहीं, लेकिन भगवान के कम भी नहीं. लेकिन दुमका में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है पैसा को भगवान से भी ऊपर रखा गया है. हमारे समाज मे पति को परमेश्वर का दर्जा प्राप्त है. पति की जान बचाने के लिए पत्नी यमराज में भी लड़ जाती है. सावित्री और सत्यवान की कहानी सुनायी जाती है. लेकिन जब कोई महिला विधवा पेंशन पाने के लिए पति को कागज पर मृत घोषित कर अपने नाम के पहले मोसमत लिखा ले और वर्षों से विधवा पेंशन का लाभ ले रही हो तो यह सोचने पर विवश हैं कि आखिर कहां जा रहा है हमारा समाज.

    यह है मामला

    दुमका जिला के सरैयाहाट प्रखंड के धनवे पंचायत के विशनपुर मुहल्ला में आशा देवी नामक महिला सधवा होकर भी विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं. कागज पर पति पवन कुमार दास मृत हैं और आशा देवी के नाम के पहले मोसमत शब्द जुड़ा हुआ है. यकीन नहीं होता तो इस सरकारी दस्तावेज को गौर से देखिए –

    द न्यूज पोस्ट ने जब पवन कुमार दास से जो सरकारी फ़ाइल में मृत घोषित हैं, इस बाबत सवाल किया तो कैमरे के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए.  कहा कि गलती हो गयी. गलती कैसे और किससे हुई यह पता नहीं. बता दें कि पवन डाक विभाग के कर्मी हैं. इस परिवार को भी यह पता है कि जो हुआ है वह बिल्कुल गलत हुआ है. तभी तो पवन के बेटे यह कह रहे हैं कि जो भी रकम अभी तक विधवा पेंशन के रूप में मिली है, उसे वापस कर देंगे.

    शादी कार्ड से हुआ खुलासा

    मामले का खुलासा भी बड़ा रोचक है. पवन दास की भतीजी की शादी कार्ड पर चाचा चाची का नाम छपा है. इसमे दोनों को जीवित दर्शाया गया है. शादी की कार्ड जब वितरित हुआ तो यह चर्चा सरेआम होने लगी कि कैसे सरैयाहाट प्रखंड में अधिकारी से लेकर कर्मी किसी भी योजना का स्थल निरीक्षण किए बिना योजना को पास कर देते हैं. इसमें पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि की भी संलिप्ता रहती है. आशा देवी को विधवा पेंशन की राशि उसके बैंक ऑफ इंडिया के खाता में जा रही थी. दस्तावेज में उनके एकाउंट का डिटेल दिया हुआ है.

    और ये जो हक से हैं मरहूम

    अब हम आपको इसी पंचायत के कुछ ऐसी विधवा से मिलवाते हैं जो सचमुच में विधवा हैं और वर्षों से विधवा पेंशन की आश में आंखें पथरा गयी हैं. सरैयाहाट की यह विधवा लंबे समय से पेंशन  पाने के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा कर थक चुकी है. बगैर योजना का लाभ लिए जीवन जीने को अपनी नियति मान बैठी हैं. ग्रामीण कहते हैं कि सरैयाहाट प्रखंड में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है जिसमें कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार लोगों के साथ साथ बिचौलिया डुबकी लगा रहे हैं.

     


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